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वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



सावन आया है


पवनेश ठकुराठी 'पवन'


 
चल री सखी झूला झूलें,सावन आया है।
मंद-मंद मुस्कान सजाता
मेरे हिय में कुरकाति लगाता मनभावन आया है।
चल री सखी झूला झूलें,सावन आया है।
चल अड्डू-पिड्डू खेलें
सुरमई हवा की मार झेलें
देख,प्रीत का मौसम पावन आया है।
चल री सखी झूला झूलें, सावन आया है।
बूँदें कल्लोल कर रहीं
मेरे आंगन में झर रहीं
देख, मधुमास का दामन आया है।
चल री सखी झूला झूलें, सावन आया है।
सुन री मेरी बहना
'उसने कहा था' का लहना
या मैंला आंचल का प्यारा बावन आया है।
चल री सखी झूला झूलें, सावन आया है।।
 

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