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वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



प्यार का कोई अफ़साना लिख


नरेंद्र श्रीवास्तव


 
प्यार का कोई अफ़साना लिख।
फिर गीत कोई मस्ताना लिख।।

जब दिनभर हमने फ़र्ज निबाहे।
तब मौसम लगा सुहाना लिख।।

निकल पड़े हम पथ नेकी पर।
कभी पड़ा नहीं पछताना लिख।।

सदा पीड़ित की पीड़ा हरने का।
लें संकल्प और निभाना लिख।।

बस अपनी हद में ही रहना है।
हद का अक्स बनाना लिख।।

सभी के रहे मुस्कान होंठों पर।
यूँ उन पर खुशी लुटाना लिख।।	 
 

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