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वर्ष: 3, अंक 42, अगस्त(प्रथम) , 2018



आ जाओ बादल


डॉ. प्रमोद सोनवानी पुष्प


                        
काली घटायें के संग आ जा ,
रिमझिम गा जा सावन में ।
आ जाओ मतवाले बादल ,
वर्षा कर दे आँगन में ।।

केवती - केवड़ा फूल सुहानें ,
महका दे इस सावन में ।
भौंरे भी मंडरायें उसमें ,
ऐसा कर दे आँगन में ।।

मिल-जुल गायें गीत मजे से ,
हमें भीगा जा सावन में ।
छम - छमा - छम हम भी नांचे ,
ऐसा कर दे आँगन में ।।
 

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