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वर्ष: 2, अंक18, अगस्त(प्रथम), 2017



हे शिव शम्भू


सुशील शर्मा


 		 
हे शिव शम्भू इस श्रावण में कैसे तेरा गुण गान करूँ।
भक्तों की लाशों पर चढ़कर कैसे तुझे प्रणाम करूँ।

निर्दोषों की बलि चढ़ा कर अत्याचारी मुस्काते हैं।
तेरे मंदिर के रस्ते में मासूम गोली से भूने जाते हैं।
हे शिव शंकर आतंकी मंसूबों को कैसे नाकाम करूँ।
भक्तों की लाशों पर चढ़कर कैसे तुझे प्रणाम करूँ।

तेरे चरणों की भक्ति प्राणों का संताप हरे।
तेरी पूजा इस जीवन में नव ऊर्जा संचार करे।
हे शिव शंकर इन दुष्टों का कैसे काम तमाम करूँ।
भक्तों की लाशों पर चढ़कर कैसे तुझे प्रणाम करूँ।

इस सावन में हे प्रभु जी मेरी ये सुनवाई हो।
जिंदा दफन हो जाय जमीं में जिसने गोली चलाई हो।
दुष्ट दरिंदों का मैं कैसे कत्ले आम करूँ।
भक्तों की लाशों पर चढ़कर कैसे तुझे प्रणाम करूँ।

हे शिव शम्भू इस श्रावण में कैसे तेरा गुण गान करूँ।
भक्तों की लाशों पर चढ़कर कैसे तुझे प्रणाम करूँ।
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