Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक18, अगस्त(प्रथम), 2017



गीत -बरखा बहार


डॉ. रेनू सिरोया कुमुदिनी


 		 
रिमझिम बरखा बरस रही है सावन की ऋत आई है 
बूंदों की सरगम ने धरा को पायलिया पहनाई है 
१.
छन छन छन छन बूँदों की धुन गाये मेघ मल्हार मधुर 
पलकों पर मोती सी बूँदें  हौले से रही चूम अधर
मन विभोर है तन चकोर है फूलों सी तरुणाई है            
२.
धरती ने फिर ओढ़ी चुनरी ,हरी हरी मन भावन सी 
संग पवन के लहराकर ये बूँदें थिरके सावन की 
महक घुल गई  साँसों में और शीतल सी पुरवाई है 
३ 
बागों में नव पल्लव फूटे नाचे मोर पपीहारा 
खुशियों के झूलों में झूले सावन आया मतवारा 
मुख पर है मुस्कान कुमुदिनी लब पर लाख दुहाई है  
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें