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वर्ष: 2, अंक18, अगस्त(प्रथम), 2017



गीत -
क्या करना है तुझे यादों का


डॉ० अनिल चड्डा


 		 
क्या करना है तुझे यादों का,
बेकार की बीती बातों का। 

हर लम्हा सुनहरा पायेगा,
तू हँसी-ख़ुशी जी जायेगा,
गर कड़वी-मीठी यादों से,
नहीं चैन गँवाए रातों का।

कोई मिलता राहों में अपना,
कोई बन जाता बीता सपना,
जो बीत गया, सो बीत गया,
ग़म न कर टूटे नातों का।

हर चीज नहीं अपनी होती,
हर बार जीत नहीं होती,
जीवन में ग़र हार नहीं होती,
कौन हो साथी मातों का।

कोई ऊँचा उठ कर गिरता है,
कोई जमीं पे रह कर फलता है, 
ग़र नीचा नहीं होना आता,
तो वज्र गिरे फिर घातों का।
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