Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक18, अगस्त(प्रथम), 2017



ग़ज़ल


सुशील शर्मा


 		 
खुद से रूबरू हो गए
लो फिर शुरू हो गए।.....

कल तक जो बेहिज़ाब थे
आज वो आबरू हो गए।.....

वफ़ा हमने की उनसे
और वो सुर्खरू हो गए।.....

इज्जत बचाने निकले थे
रास्ते में बेआबरू हो गए.....

जमाने को पढ़ाने लगे
हम सब के गुरु हो गए।.....
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें