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वर्ष: 2, अंक18, अगस्त(प्रथम), 2017



मेंढक की मस्ती


डॉ० अनिल चड्डा


 		 
रिम-झिम, रिम-झिम पानी बरसा,

मेंढक नहीं पानी को तरसा,

टर्र, टर्र, टर्र, टर्र, शोर मचाये,

उछले-कूदे नाच दिखाये,

ठंड बड़ी मुश्किल से काटी,

गर्मी नहीं है साथ निभाती,

पानी की बौछार जो आई,

खिल गया मन, पा मन भाता साथी ।
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