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वर्ष: 2, अंक 34,  अप्रैल(प्रथम) , 2018



अप्रैल फूल दिवस


बसन्ती पंवार


एक अप्रैल दिन ही कुछ ऐसा है कि सभी एक-दूसरे को मूर्ख बनाना चाहते है, लेकिन बनना कोई भी नहीं चाहता । तभी तो इस दिन लोग ज्यादा सतर्क रहते हैं कि कहीं कोई हमें उल्लू न बना दे ।

एक अप्रैल का दिन दुनियाभर में मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाता है । इस दिन मिलने वाली किसी भी सूचना या बात को अक्सर बिना जांच-पड़ताल के गंभीरता से नहीं लिया जाता । यह दिन प्रतिवर्ष एक अप्रैल को अफवाहें फैलाकर, शरारतों के द्वारा मनाया जाता है । जो इन अफवाहों को सच मान लेते हैं, उन्हैं अप्रैल फूल या अप्रैल मूर्ख कहा जाता है । लोग अपने द्वारा की गई शरारतों का खुलासा, ‘अप्रैल फूल बनाया‘ चिल्लाकर करते हैं ।

19वीं षताब्दी से अप्रैल फूल प्रचलन में है । अंग्रेजी साहित्य के पिता ज्योफ्री चैसर की कैंटरबरी टेल्स (1392) ऐसा पहला ग्रंथ है, जिसमें एक अप्रैल और बेवकूफी के बीच संबंध स्थापित किया गया था । इसमें एक कस्बे का जिक्र किया गया है । इसमें इंगलैण्ड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी की सगाई की तारीख 32 मार्च, 1381 को होने की घोशणा की गई थी, जिसे वहां के लोग सही मान बैठे और मूर्ख बन गए , तभी से एक अप्रैल को मूर्ख दिवस मनाया जाता है ।

अपने जान-पहचान वालों को बिना अधिक परेशान किए, मजाक के माध्यम से षरारतें करने का यह उत्सव हर देष में मनाया जाता है । इसे मनाने की प्रेरणा रोमन त्योहार हिलेरिया से ली गई । इसके अलावा भारतीय त्योहार होली और मध्यकाल का फीस्ट आॅफ फूल (बेवकूफों की दावत) भी इस त्योहार की प्रेरणा माने जाते हैं ।

ऐसा भी माना जाता है कि अप्रैल फूल की षरूआत 17वीं सदी से हुई, परंतु पहली अप्रैल को ‘फूल्स डे‘ के रूप में मनाया जाना और लोगों के साथ हंसी-मजाक करने का सिलसिला सन् 1564 के बाद फ्रांस से षुरू हुआ ।

चैसर की कैंटबरी टेल्स एक कहानियों का संग्रह थी, उसमें एक कहानी ‘नन की प्रीस्ट की कहानी‘ मार्च के 30 दिन और 2 दिन में सेट थी, जिसे प्रिटिंग की गलती समझा जाता है और विद्वानों के हिसाब से, चैसर ने असल में मार्च खत्म होने के बाद 32 दिन लिखे । इसी कहानी में एक घमंडी मुर्गे को, एक चालाक लोमड़ी ने बेवकूफ बनाया था ।

1539 में फ्लेमिष कवि एडवर्ड डे डेने ने एक ऐसे आॅफिसर के बारे में लिखा, जिसने अपने नौकरों को एक बेवकूफी की यात्रा पर एक अप्रैल को भेजा था । 1968 में इस दिन को जाॅन औब्रे ने मूर्खों का छुट्टी का दिन कहा क्योंकि एक अपे्रल को बहुत से लोगों को बेवकूफ बनाकर , ‘षेर की धुलाई देखने‘ धोखे से लंदन के टाॅवर पर एकत्रित किया गया था ।

‘आॅल फूल्स डे’ रोम में सात दिन तक मनाया जाता है और चीन की भांति बैरंग पार्सल भेजकर मूर्ख बनाया जाता है । जापान में बच्चे पतंग पर इनामी घोषणा लिखकर उड़ाते हैं । पतंग पकड़कर इनाम मांगने वाला ‘अप्रैल फूल‘ बन जाता है ।

यह दिन मूर्ख बनकर या मूर्ख बनाकर भी मन को सुख देता है । यह अनूठा भाव ही इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है । मूर्ख बनने या बनाने का उद्देश्य ठगने या ठगाने से नहीं है, वरन् इसका संबंध थोड़ा सा सुख और आनंद पाने की उन मानवीय भावनाओं से है , जिसके लिए प्रत्येक व्यक्ति जीवन में दिनरात झूझता है । किसी भी मित्र को मूर्ख बनाने का अपना अलग ही मजा है । कई बार तो मूर्ख बनने वाले को काफी कष्ट भी पहुंचता है । अतः मूर्ख बनाते समय सभी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मजाक से किसी का बुरा न हो ।

इस तनावभरी भागदौड़ की जिन्दगी में इस मूर्ख दिवस का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है । यह दिवस कुछ समय के लिए ही सही मन को सुकून देने के लिए काफी है । अतः सभी मूर्ख बने बनाएं । हंसें- हंसाएं । मूर्ख दिवस की सभी को बहुत-बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं ।


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