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वर्ष: 2, अंक 34, अप्रैल(प्रथम), 2018



हाइकु


नरेन्द्र श्रीवास्तव


(1)
धूप तपन तनहा अगन-सी तन जलाती।
(2)
धूप आई तो बरगद की छाँव पसीना चूमे।
(3)
धूप की लीला गली-गलियारे में पसीना नृत्य।
(4)
अंगारे लिये प्यासी धूप मागती घड़े का पानी।
(5)
वैसाखी धूप बरगद की छाँव बनी बैसाखी।
(6)
धूप ज्यूँ कर्फ्यू चिड़िया भूखी बैठी दुःखी पीपल।
(7)
धूप की जिद पसीना ले के रही हार न मानी।
(8)
धूप जलती पीपल की छाँव में सुकून देख़।

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