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वर्ष: 2, अंक 34, अप्रैल(प्रथम), 2018



जीवन-सरिता के कूल


डॉ योगेन्द्र नाथ शर्मा "अरुण


    
जीवन-सरिता के कूल हैं दो,
      सुख हँसना है,दुःख रोना है!
अहम मिले,तो माटी  मानो,
      विनय  मिले  तो सोना है!!

     सुख आता, मुस्कान सजाता,
        दुःख आता, तो आँसूं लाए!
           उद्गम से संगम तक जीवन,
             दोनों के संग चलता जाए!!

सुख में उड़ना,दुःख में गिरना,
        जीवन नियति-खिलौना है!
अहम  मिले,  तो माटी  मानो, 
        विनय  मिले  तो  सोना है!!

    जो भी पाया, बांटे नदिया,
       खुद की प्यास वो कहाँ मिटाती!
          धरती के कण-कण को सींचे,
              समृद्धि के सुमन खिलाती!!

जीवन  तो  है  हर  पल  देना, 
            तप  कर  कुंदन  होना है!
अहम मिले, तो माटी  मानो, 
            विनय  मिले  तो सोना है!!

    हम भी सरिता हो जाएं तो,
       जग की प्यास बुझा पाएंगे!
          जीवन के उपवन में तब ही,
              सुन्दर सुमन खिला पाएंगे!!

जीवन है क्षण भंगुर पगले!
           इक दिन तो इसको खोना है!
अहम मिले, तो माटी  मानो, 
           विनय  मिले  तो  सोना है!!
   

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