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वर्ष: 2, अंक 34, अप्रैल(प्रथम), 2018



मत पूछिये


कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’


 
किस तरह कटती है , अपनी जिंदगी मत पूछिये, 
कितने गम देखे हैं ,क्या - क्या ख़ुशी मत पूछिये।
 
साँस लेने भर को ही फुर्सत किसे है आजकल, 
इस कदर मसरूफ  क्यूँ है आदमी , मत  पूछिये।
 
जैसी हूँ मैं , वैसी हूँ मैं ,और कुछ जानूँ नहीं, 
क्या है खूबी और मुझ में क्या कमी , मत  पूछिये।
 
उस के बिन भी , साथ भी दुश्वार है जीना मेरा, 
क्या है सबब , क्या है मेरी बेबसी मत पूछिये।
 
साँस लेने पर भी चलती है हुकूमत साब की, 
उन की तानाशाही , मेरी बेबसी , मत पूछिये।
 
कीजिये अन्दाजा उस की शायरी और हुस्न से, 
शायरा 'कमसिन 'है कितने साल की , मत पूछिये। 

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