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वर्ष: 2, अंक 34, अप्रैल(प्रथम), 2018



तेरे बगैर


डॉ. दिनेश त्रिपाठी ‘शम्स’


 
फूल सबके सब हमें अब खार हैं तेरे बगैर, 
ये जाने रंग-ओ-बू बेकार हैं तेरे बगैर।

हर खबर बेलुत्फ बासी धुंधला धुंधला हर बरक, 
हम पुराने दिनों के अखबार हैं तेरे बगैर।

तूने खुशियों के कबीले से निकाला था हमें,
अब गमों के गांव के सरदार हैं तेरे बगैर।

दर्द तन्हाई घुटन आवारगी और ये ग़ज़ल, 
आजकल ये सब हमारे यार हैं तेरे बगैर।

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