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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 59, अप्रैल(द्वितीय), 2019

तहज़ीब

सुदर्शन खन्ना

अमीर कालोनी की एक आलीशान गाड़ी में जब भी अलसेशियन कुत्ता जैक अपने मालिक के साथ सुबह सुबह हवाखोरी करने निकलता तो राह में मिलते सड़क के कुत्ते उसे देख कर भौंकते और काफी दूर तक पीछा करते, जैक भी भौंकता। एक दिन मालिक ने जैक से कहा ‘बिल्कुल भी तहज़ीब नहीं है इन कुत्तों को, भौंक भौंक कर शांति भंग कर देते हैं।’ बात जैक को चुभ गई, आखिर उसी की जात के तो हैं। एक दिन सुबह-सुबह हर रोज़ की भांति जब जैक गाड़ी में से सिर निकाले ठंडी हवा खाते हुए जा रहा था तो हमेशा की भांति सड़क के कुत्ते उस गाड़ी के साथ साथ भागते हुए भौंकने लगे। वातावरण में शोरगुल सा मच गया था। जैक उन्हें देख भौंका और बोला ‘ज़रा तहज़ीब तो सीख लो, इस तरह से भौंकना अच्छा नहीं है।’ सड़क के कुत्ते उसकी बात सुनकर हैरान रह गए और आपस में चर्चा करने लगे। उधर मालिक को भी यह महसूस हुआ कि जैक ने आज अलग तरह से भौंका था।

एक दिन रात को उस अमीर कालोनी में जबरदस्त पार्टी थी। हर तरह के व्यंजन परोसे जा रहे थे। सड़क के कुत्ते भी सूंघते सूंघते वहां आ पहुंचे थे। ‘कल सुबह तो हमारी पार्टी हो सकती है’ सभी ने आपस में एक दूसरे से कहा था और फिर वहां से चले गये। सुबह-सुबह कुत्ते अंगड़ाइयां लेते हुए, कसरतें करते हुए उस कालोनी में जा पहुंचे और उनके अनुमान के मुताबिक अभी बहुत सा खाने का सामान बड़े-बड़े डस्टबिन होने के बाद भी बिखरा पड़ा था। उन कुत्तों ने कुछ बचा हुआ खाने का सामान एक जगह इकट्ठा किया और पार्टी मनाने की योजना बनाई। अभी वे आराम से बैठकर खाना शुरू ही करने वाले थे कि जैक वाली कार तेज़ी से आई जिसे देखकर कुत्ते जान बचाने के लिए इधर उधर हो गये और गाड़ी के पहिए उनके इकट्ठे किये सामान को रौंदते हुए निकल गए। यह देखकर कुत्ते फिर गाड़ी के पीछे भागे और भागते भागते बोले ‘हमें तहज़ीब सीखने की बात करते हो, ज़रा अपने मालिक को तहज़ीब सिखाओ, हमारे खाने को गाड़ी से रौंदता चला गया है।’ जैक ने शर्म से सिर झुका लिया और गाड़ी के अन्दर दुबक गया।


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