मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 59, अप्रैल(द्वितीय), 2019

जुगाड़

लीला तिवानी

बार-बार रेडियो पर ''अपने मतदान का प्रयोग अवश्य करें, आपका वोट बहुत कीमती है'' कभी वोट न डालने जाने वाला दिनेश बहुत सोच में पड़ गया था. उसकी स्मृति में बचपन में सुनी हुई एक बाल कथा 'एक लोटा दूध' घूम रही थी.

''एक राजा के राज्य में सूखा पड़ा और जनता 'हाय-हाय' करने लगी. राजा ने मुनादी करवा दी-

“यदि आज रात गाँव का प्रत्येक परिवार गाँव के बाहर स्थित सूखे कुएं में बिना झांके एक-एक लोटा दूध डालेगा, तो कल से गाँव में बारिश प्रारंभ हो जायेगी और सूखे की समस्या समाप्त हो जायेगी.”

सभी ने ऐसा किया और दूसरे दिन से बारिश की प्रतीक्षा करने लगे, लेकिन बारिश नहीं हुई.

दूसरे दिन सभी गाँव वाले सुबह से ही बारिश की प्रतीक्षा करने लगे. लेकिन दोपहर हो गई और बारिश के कोई आसार नज़र नहीं आये. किसी को समझ नहीं आ रहा थे कि ऐसा क्यों हुआ?''

आखिरकार सब गाँव के बाहर के सूखे कुएं के पास पहुँचे और उसके अंदर झांक कर देखा. सभी यह देख आश्चर्यचकित रह गए कि कुएं में एक बूँद दूध नहीं था. वहाँ बस पानी भरा हुआ था. सबने एक-दूसरे के भरोसे कुएं में पानी ही डाल दिया था.''

''अगर सभी लोग ऐसे ही एक-दूसरे के भरोसे रहकर वोट नहीं डालने जाएंगे, तो हमारे हरे-भरे लोकतंत्र का क्या होगा?'' दिनेश ने सोचा.

उसके हाथ मतदाता सूची में अपना नाम ढूंढने के जुगाड़ में लग गए.


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें