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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 59, अप्रैल(द्वितीय), 2019

जल पर दोहे

सुशील शर्मा

आज प्रदूषित जल बना ,जीवन का संहार। रोग दर्द संताप है ,हम सब जिम्मेदार। संकट में जीवन पड़ा ,मचा धरा उत्पात। त्राहि त्राहि मानव करे ,बंद हुई बरसात। खेत रसायन से भरे ,जहर बना है अन्न। गांव खण्डहर बन गए ,पनघट सूने सन्न। जल संकट गहरा रहा ,जल बचाइए आप। बिन जल सब सूना रहे ,जल ही माई बाप। किलक हुलस बहती रहें ,नदियाँ बन के धार। अमृत कलश बनकर बहें ,बन जीवन उद्गार। गुल्म लता तरु राग हैं ,घास मधुर आलाप। जल जीवन संगीत है ,नदिया नीर मिलाप।


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