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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 82, अप्रैल(प्रथम), 2020

स्मृति आघात

राजीव कुमार

यादों में खोए रहने की आदत ने प्रवेश के दिमाग की कितनी ही नसें सड़ा दी थी, इसका खूलासा मेडिकल चेकअप में हुआ था। डाॅक्टर ने यादों से बाहर निकलने और खुद को व्यस्त रखने की बहुत सारी तरकीबें बताइं थीं, मगर सब बेअसर। उसके माँ-पिताजी को इस बात की भनक लगते ही ये कहकर बुलवा लिया था कि ’’ तुम्हारा नहीं तो कम से कम हमारा मन बहल जाएगा, तुम जल्दी से आ जाओ।’’ प्रवेश की आदत में कोई बदलाव नहीं आने के कारण उसके माता पिता बहुत चिंतित रहने लगे और यादों के फुल प्रेशर में रहते हैं। चिन्ता का कारण प्रवेश का दूर रहना नहीं बल्कि न रहना है।


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