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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



प्रेम सभी को होता है


डॉ० अनिल चड्डा


प्रेम सभी को होता है,
कोई कहता, कोई नहीं कहता है।
दर्द मिले इन राहों में,
कोई सहता, कोई नही सहता है।

मुश्किल से जीवन मिलता,
इसमें क्यों फिर रोना है
बड़ी मुश्किल से खुशियाँ मिलें,
इनको क्यों फिर खोना है
जीने की कोशिश में यहाँ, 
कोई मरता, कोई नहीं मरता है। 

हर कदम पर नया आयाम मिले,
काँटों में ही तो फूल खिले, 
गिर-गिर के उठना पड़ता है,
फिर क्यों हम चलने से डरें,
हम सबको चलना पड़ता है,
कोई डरता, कोई नहीं डरता है।

सम्बल तेरा अपनी हिम्मत,
दीवानों सी तू कर मेहनत,
खुद राह नजर तुझे आयेगी,
ये जीवन बन जाये जन्नत,
यही गुरुमंत्र है जीवन का,
कोई समझता, कोई नहीं समझता है।
 
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