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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



तेरे दीदार को....


सुशील शर्मा


तेरे दीदार को हम कुछ इस तरह तरसते रहे।
जिंदगी में भी मौत के शोले बरसते रहे।

तुम्हारे हुश्न के जलवे में डूबा है जमाना।
और हम किनारे पर खड़े प्यासे तरसते रहे।

लोग तुम्हारे रूप को आंखों से पीते रहे।
हमारी आंखों से जलन के शोले बरसते रहे।

एक नजर देख कर तुमने फिर अनदेखा कर दिया।
हम इश्क़ के इज़हार के लिए दर दर भटकते रहे।

यों गेरों पे करम करके न हमको ठुकराओ।
तुम्हारी राहों में हम बादल बन कर बरसते रहे।
 
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