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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



मुझे मंजूर नहीं


सुशील शर्मा


तू किसी और को सवारें मुझे मंजूर नहीं।
उल्फ़ते इश्क़ में सहारे मुझे मंजूर नहीं।

तू सिर्फ लिखा है मेरी किस्मत में।
तूं किसी और को पुकारे मुझे मंजूर नहीं।

चांद तारे सितारों सा रोशन है तूं।
तेरे दर पे अंधियारे मुझे मंजूर नहीं।

तेरी मुस्कुराहट पे जान भी निसार है।
दर्द तुझको गर निहारे मुझे मंजूर नहीं।

खुदा ने तुझे बनाया है मेरी खातिर।
इस जहां के सितारे मुझे मंजूर नहीं।

तेरी जुल्फ के साये में जन्नत मेरी।
मेरा इश्क़ तू नकारे मुझे मंजूर नहीं।
 
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