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वर्ष: 2, अंक 20, सितम्बर(प्रथम), 2017



हम भी हैं आपके


राकेश कुमार श्रीवास्तव


हम भी हैं आपके जरा खबर तो लीजिये,
रहते हैं साथ में जरा नज़र तो कीजिये।

बेशक़ उड़ान भर रहे हैं आसमां में आप,
चलना ज़मीं पे है ज़रा उतर तो लीजिये।

मरने के डर से स्वाभिमान खो दिया तो क्या,
ज़िंदा रहेगा नाम ज़रा मर तो लीजिये।

जो आगे बढ़ा उसको रास्ते भी मिल गए,
मंज़िल भी मिलेगी ज़रा सफ़र तो कीजिये।

चुपचाप बैठने से तबज़्ज़ो नहीं मिलती,
सुनने लगेंगे सब ज़रा उज़र तो कीजिये।।
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