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वर्ष: 2, अंक 23, अक्टूबर(द्वितीय), 2017



चतुराई


कुबेर


बच्चों की देखभाल करने के लिए सियार और उसकी पत्नी सियरनिन को नियुक्त किया गया था। कुछ दिनों के बाद बच्चों के मरने और गायब होने की शिकायतें आने लगीं। शिकायतों की जांच करने के लिए अधिकारियों का दल भेजा गया।

सियरनिन बहुत घबराईं।

सियार ने पत्नी सियरनिन से कहा - ’’घबराओ मत। कुछ नहीं होगा। जब कोई जांच करनेवाला पूछे कि बच्चे किस हालत में हैं? तो जोर से कह देना - जय श्रीराम।’’

सियरनिन - ’’और पूछे कि बच्चे रो क्यों रहे हैं, तब?’’

सियार - ’’तो फिर जोर से कह देना - जय श्रीराम।’’

सियरनिन - ’’और पूछे कि बच्चे गायब क्यों हो रहे हैं, तब?’’

सियार - ’’तो और जोर से कह देना - जय श्रीराम।’’

सियरनिन - ’’और पूछे कि बच्चे मर क्यों रहे हैं, तब?’’

सियार - ’’प्रिये! तो और भी जोर से कह देना - जय श्रीराम।’’

जांच दल आया। सियरनिन से सवाल पूछने का क्रम शुरू हुआ।

सियरनिन ने जवाब देना शुरू किया - ’’जय श्रीराम!’’

सियार की तरकीब काम आ गई।

जांच करनेवालों को बात तुरंत समझ में आ गई - ’विधाता ने जीवन के जितने पल-छिन और दिन लिखा है उससे राई घटे, न तिल बढ़े।’ जय श्रीराम।

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