Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 23, अक्टूबर(द्वितीय), 2017



हाइकु


अशोक बाबू माहौर


 
 (1)
परिंदे आज
पर फैलाये बैठे
सड़क पर।
 (2)
करवा चौथ
सुहागिन औरतें
करें श्रंगार।
 (3)
चाँद छुपता
बादल इठलाते
हल्की फुहारें।
 (4)
खूब सन्नाटा
घास क्यों लेटी हुई
चिराग नहीं।
 (5)
कर श्रंगार
पति का इंतजार
छलनी हाथ।
 
www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें