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वर्ष: 2, अंक 23, अक्टूबर(द्वितीय), 2017



गीत
वे किस कदर हैं प्यार में


अमरेन्द्र सुमन


वे किस कदर हैं प्यार में, परेशान देखिये !
एक हमसफर की चाह में, नादान  देखिये !
दिख गई क्या मुस्कुराती  चाँदनी एक  दिन
नाम उसकी ही जुवां पर सुबहो-शाम देखिये !!

वे किस कदर हैं प्यार में..........................2
एक हमसफर की याद में.........................2

सुलझे  बड़े  जनाब  किन्तु, जज्बात  देखिये !
झुलस रहे जिस आग में, उसकी  ताप देखिये !
एक चेहरा दिख गया क्या, मर-मिट गए हुजूर
रह  गया  इंसान  की  क्या,  औकात  देखिये !!

वे किस कदर हैं प्यार में.................................2
एक हमसफर की याद में.................................2

एक  मुहब्बत  की  खुशी  में, छोड़  रहे अपनी जमीं
रास्ते    अनजान   फिर    भी   चाल  देखिये !
थम  गई  मन  की  बैचेनी,  देखकर  मंजिल  करीब
शर्तियाँ  मिलने  की सरकार,  दरकार  देखिये !

वे किस कदर हैं प्यार में......................................
एक हमसफर की याद में......................................

सुलझे  बड़े  जनाब  किन्तु, जज्बात  देखिये !
झुलस रहे जिस आग में, उसकी  ताप देखिये !
एक चेहरा दिख गया क्या, मर-मिट गए हुजूर
रह  गया  इंसान  की  क्या,  औकात  देखिये !!

वे किस कदर हैं प्यार में.................................2
एक हमसफर की याद में.................................2
 		 
 
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