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वर्ष: 2, अंक 23, अक्टूबर(द्वितीय), 2017



ऐसी ज़िंदगानी चाहिए


प्राण शर्मा


 
शहरों में इसकी भी नित चर्चा करानी चाहिए 
चुगली करने वालों से दूरी बनानी चाहिए 

मीठी बानी चाहिए और मेहरबानी चाहिए 
दोस्तों की दोस्ती ऐसी सुहानी चाहिए 

सोचता हूँ , हर किसी के अच्छे कामों के लिए 
हर किसी को प्यार से ताली बजानी चाहिए 

वो मरा तो समझियेगा ज़िंदगी भी मर गयी 
ज़िंदा मेरे दोस्तो आँखों का पानी चाहिए 

पढ़ने वालों को दिखें अपनी ही उसमें झाँकियाँ 
लिखने वाले, कुछ न कुछ ऐसी कहानी चाहिए 

वो अगर सूखी नदी सी ही लगी तो क्या लगी 
ज़िंदगानी में समंदर सी रवानी चाहिए 

दुःख में भी वो घड़ी आये नज़र हँसती हुयी 
हर किसी की `प्राण` ऐसी ज़िंदगानी चाहिए 
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