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वर्ष: 2, अंक 23, अक्टूबर (द्वितीय), 2017



डॉ० रिक लिंडल द्वारा रचित अंग्रेजी पुस्तक 'The Purpose' का हिंदी अनुवाद
[.....पिछले अंक से] अध्याय 2
"गर्मी का आनन्द और रूह का अस्तित्व"


लेखक: डॉ० रिक लिंडल
अनुवादक: डॉ० अनिल चड्डा


फार्म पर जीवन सामान्य रूप से चल रहा था. वहाँ बहुत दिलचस्प काम थे. इनमें से एक गायों को नजदीक के फार्म, सेल,28 पर ले जाना था, जब वह उत्तेजना में होती थी, क्योंकि लक्जमोट पर उनके साथ मैथुन करने के लिये कोई बैल नहीं होता था. उन अवसरों पर सिग्गी रस्सी से बनी नकेल का पट्टा गाय के सिर पर बाँध देता था और उन्हें घुमावदार पहाड़ियों और दलदल के पार ले जाता था, जबकि रिक्की गाय को पीछे से हाँकता था. सेल पर जाने के लिये कुछ घंटे लगते थे. इन यात्राओं के दौरान, सिग्गी और रिक्की अक्सर लम्बे समय के लिये चुप रहते थे जबकि वह घुमावदार पहाड़ियों के सुंदर दृश्य में डूबे रहते थे, जिनमें से कुछ चोटी पर आबोहवा के कारण बर्बाद हो गये थे, जिससे कंकडो के कुछ भाग उजागर हो गये थे. पहाड़ियाँ घास और उत्तरी ध्रुव के गुच्छों से घिरी हुई थी, जिनमें जामुन और ब्लूबेरी की पत्तियों की लकीर और बैंगनी लाल झाड़ियों के क्षेत्र छितरे हुए थे. पत्तियों में हरेक प्रकार की चिड़िया उड़ रही थीं – जिनमें से सबसे सुंदर सुनहरी प्लोवर थी, और उन्होंने आम चाहा पक्षी भी देखा , व्हिम्ब्रेल, चितकबरी खंजन29, उत्तरी ह्वोटईयर30, कहीं-कहीं चट्टानों पर काले कौवे बैठे हुए थे जहां उनके ताजे खाए हुए जामुनों के नीले-काले धब्बे पड़े हुए थे. यदा-कदा मच्छरों के झुण्ड, कहीं-कहीं मक्खी, और कुछ तितलियाँ थीं, लेकिन इससे पहले कि वह कुछ परेशान करते, देश के उस क्षेत्र में लगातार चलती उत्तरी-पश्चिमी हवा के कारण, वह हवा से उड़ जाते थे. एक अकेली वृद्ध मकड़ी झाड़ी में इधर-उधर दौड़ने में व्यस्त थी, लेकिन कोई भी कीड़ा-मकौड़ा नहीं था. रिक्की पर्वतों के पार दूर तक देख सकता था, बहुत दूर पहाड़ियों की ओर, क्योंकि कोई वृक्ष नहीं थे जो उसके देखने के रास्ते को अवरूध्द कर पायें. उसका दिमाग भटक रहा था, और जब रिक्की गाय को हाँक रहा था, जो छोटी-छोटी रुकावटें, जैसे दलदल की धाराएं और टुकड़ों को पार करने में हिचकिचा रहीं थीं, तो उसे यह विचार आया कि उसे सिग्गी को बौनी-स्त्री के साथ हुए अपने हाल ही के अनुभव को और हीथर हिल्ल में पुरानी आत्मा के बारे में बता देना चाहिये. उसे पता था कि सिग्गी को इन मामलों में बहुत अधिक दिलचस्पी थी और यह भी कि उसने अध्यात्मिक मुद्दों पर और गोपनीय आयामों में प्राणियों के बारे में बहुत अच्छी तरह से पढ़ा है. रिक्की ने इस वार्तालाप को इस बात से शुरू किया, “मैं कुछ दिन पहले अपने ‘फिल्ग्जा’ से मिला था.” सिग्गी ने प्रतिक्रिया दी, “यह सुनने में अच्छा है. सभी आदमियों का एक फिल्ग्जा होता है, सभी इतने भाग्यशाली नहीं होते कि उनसे व्यक्तिगत रूप से मिल पायें. वह कैसे हुआ?”

रिक्की ने वह कहानी बताई कि कैसे वह बौनी-स्त्री से फार्म के पीछे वाली चट्टानों में मिला था और उसने उसके पिता को, जब वह बारह वर्ष के थे और झाड़ी घाटी नदी के पुल को पार करते हुए नीचे गिर गये थे, निश्चित मृत्यु से बचाने के बारे में क्या बताया था.

सिग्गी को वह घटना याद आई और उसने कहा, “हाँ, मुझे याद है जब वह मेरे छोटे भाई के साथ हुआ था. हम सब हैरान हुए थे जब वह गिरने के बाद एक भी चोट या खरोंच केबिना घर वापिस आया था. उसने कभी भी बौनी-स्त्री के बारे में बात नहीं की, लेकिन मुझे कोई संदेह नहीं है कि बौने उस पुल के नीचे चट्टानों में रहते हैं.”

रिक्की ने जारी रखा,”बौनी-स्त्री मृत्यु के समीप थी जब मैं उसके बिस्तर के पास गया, और उसने छाछ पिलाने के लिये कहा, जिसे मैं उसके लिये ले गया. इसने उसका जीवन बचा दिया.”

सिग्गी ने कहा,”तुमने उसे बचा कर बहुत अच्छा किया, क्योंकि बौनी-स्त्री का ऋण चुकाने से मना करने पर तुम्हारे लिये अनगिनित परेशानिया आ जाती.”

रिक्की, जिसका जोश और साहस बढ़ रहा था, ने जारी रखा,”उसने बाद में मेरे फिल्ग्जा से पहचान कराई, जिसने मुझे रूहों के संसार और मेरे पिछले दो जन्मों के बारे में बताया. मेरे फिल्ग्जा ने मुझे यह भी बताया कि मैं एक आत्मा हूँ और यह मेरी आत्मा मेरी ऊपरी-आत्मा का रूप है जो एक ही समय में अध्यात्मिक आयाम में रहती है. मेरी आत्मा शाश्वत है और यह कभी नहीं मरेगी.”

सिग्गी आत्मविश्लेषण कर रहा था और पूछा, “तुम धरती से पहले से ही परिचित हो, मनुष्यों की भूमि, जिसमें हम अब रह रहे हैं, और यह अच्छा है कि तुम्हारा परिचय अब रूहों की भूमि से भी हो गया है. एक ही समय में अलग-अलग आयामों में अस्तित्व होने की सच्चाई सभी लोगों के लिये स्वीकार करना आसान नहीं है, लेकिन अब जब तुम इसे अपनी छोटी सी आयु में जानते हो, यह अच्छी तरह से तुम्हारे काम आयेगा. क्या तुम जानते हो कि तुम्हारा फिल्ग्जा कौन है?”

रिक्की ने कहा,” नहीं मैं नहीं जानता. यह रूह-प्राणी परिचित सा लगता है, और लगता है कि मुझे जानता है.”

सिग्गी ने उत्तर दिया, “वह अच्छा प्रतीत होता है. मेरे विचार में मैं समझ गया.” थोड़ी चुप्पी के बाद, जब वह गाय को एक छोटी धारा पार कराने के लिये मश्शकत कर रहे थे, सिग्गी ने जारी रखा, “रूह मार्गदर्शक निश्चित रूप से होते हैं. कुछ ऐसी रूहें भी होती है जो मार्गदर्शक होने का नाटक करती हैं. कुछ दुष्ट होती हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर मरे हुए व्यक्तियों की होती हैं जो खो गई हैं और जिसकी मंशा नुक्सान पहुँचाने की नहीं होती.”

रिक्की ने पूछा,”आपका क्या मतलब है?”

सिग्गी ने उत्तर दिया,”फिल्ग्जुर सामान्यतया नजदीकी रिश्तेदार होते हैं जो मृत्योपरांत रूहों के संसार में चले जाते है. उदाहरणार्थ, वह आपकी दादी या दादा हो सकते हैं. वह अक्सर आते हैं और जब वह देखते हैं कि उनके पोते-पोतियाँ अकेले हैं तो उनके साथ खेलते हैं, और वह उनको हानि से बचाने की कोशिश करते हैं. हालांकि बहुरूपिये भी होते हैं जो फिल्ग्जर होने का नाटक करते हैं. वह समय में वापिस यात्रा कर सकते हैं और व्यक्तिगत जानकारी ले लेते हैं जो उन्हें वह होने का नाटक करने में सहायता करते हैं जो वह नहीं हैं, जैसे कि तुम्हारी दादी या कोई ऐसा जिसकी तुम बहुत ज्यादा परवाह करते थे और वह मर गया है. वह फिर असंदिग्ध व्यक्ति से झूठा ढोंग करके बहुत प्यार जताते हैं, जो वह नहीं हैं उसका नाटक करके.31 अक्सर प्राथमिक पहचान औइजा बोर्ड के द्वारा या किसी माध्यम के द्वारा होती है, जहां असंदिग्ध व्यक्ति रूह को उससे बात करने के लिये आमंत्रित करता है. जब यह सम्बन्ध समय के साथ विकसित होता है, तो रूह व्यक्ति की आभा से जुड़ जाता है और फिर उस व्यक्ति के शरीर के द्वारा भौतिक संसार का अनुभव लेती है. रूह फिर धीरे-धीरे अपनी इच्छा असंदिग्ध व्यकित पर लादना शुरू कर देती है, उससे यह कहते हुए कि क्या करना है और क्या नहीं करना है. व्यक्ति ऐसी अवधियों का अनुभव करना शुरू कर देता है जब रूह का व्यक्तित्व उसके शरीर पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लेता है.”

रिक्की ने कहा, “यह बड़ा अजीब लगता है.”

सिग्गी ने कहा, “हाँ यह है, लेकिन यह सच है. इस तरह की घटनाओं के बहुत सारे लिखित मामले हैं. इस तरह की रूहों की मंशा हमेशा स्वार्थी होती है और तुम्हे स्वयं को इनसे दूर रखना चाहिए.”

रीक्की जानने को उत्सुक था, “मैं इस तरह की रूहों को कैसे पहचानूँ?”

सिग्गी ने उत्तर दिया, “अपने फिल्ग्जा और दुष्ट आत्मा में फर्क करने का एक तरीका है. अपने फिल्ग्जा को पहचानने का निश्चित तरीका है कि वह कभी तुम पर नियंत्रण करने की कोशिश नहीं करेगा या तुम्हे यह कहे कि तुम्हे ऐसा करना है. फिल्ग्जुर तम्हारे मार्गदर्शन के लिये केवल अपनी सलाह देते हैं. इसीलिये उन्हें मार्गदर्शक की भांति देखा जाता है. एक दुष्ट रूह, दूसरी और, रौब जमाती है और तुम्हे नियंत्रित करने की चेष्टा करती है.”

रिक्की ने कहा,”मैं इसे दिमाग में रखूँगा जब मैं अपने फिल्ग्जा को और अच्छी तरह जान पाऊँगा.”

सिग्गी ने प्रतिक्रिया व्यक्त की, “कृपया आ करा मुझसे बात करना जब भी तुम्हे को संदेह हो तो.”

रिक्की ने पूछा,”क्या यह बुरी आत्माएं शैतान होती हैं? क्या वह नरक में होती हैं?”

सीग्गी ने कहा, “जो कुछ भी है, नरक के समेत, प्रभु है यदि वह वास्तव में है तो. सभी मनुष्य प्रभु के बच्चे हैं, लेकिन, जैसा कि तुम जानते हो, बच्चे हमेशा ही ठीक व्यवहार नहीं करते. कभी-कभी वह दुर्व्यवहार करके अपने कार्यों के परिणामों से सीखते हैं. यह दुष्ट आत्माएं पहले मनुष्य हुआ करती थीं. हो सकता उन्होंने क्रोध में कुछ ऐसे काम किये हों जो वह जानती थी कि गल्त थे, और अब वह दोष और क्रोध की भावनाओं से ग्रसित हैं, जो वह निश्छल लोगों पर निकालती हैं. प्रभु रूहों के लिये नरक नहीं बनाता, लेकिन रूहें अपने विचारों में उन्हें अपने लिये खुद ही बनाती हैं. यह रूहें अपने ऊपर ‘स्वयं ही थोपे’ हुए नरक में हो सकती हैं, जो डरावना और अकेला स्थान होता होगा.”

रिक्की ने कहा,”यह बड़ा खौफनाक लगता है. भूतों के बारे में क्या? मुझे लगता है रात में कभी-कभी मैं किसी को अपने शयनकक्ष के बाहर गलियारे में चलते हुए सुनता हूँ.”

सिग्गी ने उत्तर दिया, “हाँ, मेरी पत्नी ने भी मुझे बताया है कि जब वह गलियारे के नजदीक की सीढियों से रात को अकेले ऊपर जाती है तो उसने कुछ अवसरों पर किसी को उसके बालों को पीछे से सहलाते हुए महसूस किया है. मैं भूतों के बारे में ज्यादा नहीं जानता हूँ, इसके अलावा कि वह सम्पूर्ण आत्माएं नहीं होती. एक भूत एक आत्मा का अंश है, किसी भावनात्मक अनुभव के साथ जुड़ा हुआ, जो पीछे रह गया था जब आत्मा के प्रमुख अंश ने शरीर को मृत्यु के समय ऊपरी आत्मा से मिलने के लिये छोड़ा था. आत्मा का यह टुकड़ा यह महसूस करता है कि वह जा नहीं सकता, और इस धरातल पर अधूरे कार्य के कारण पीछे ही रह गया है. वह शांत नहीं हैं और यूँ ही घूमती रहती हैं, वह उत्तेजित या परेशान रहती हैं. उदाहरणार्थ, यह उनके जीवन में किये गये कार्यों के अनसुलझे हुए दोष या उनके मृत शरीरों के अनसुलझे हुए मुद्दे, जिनका उल्लंघन किया गया हो या उन्हें ढंग से दफन न किया गया हो, के कारण हो सकता है. भूत कभी-कभी जीवित प्राणियों का ध्यान आकर्षित करने के लिये उन्हें यन्त्रणा देते हैं.”

रिक्की ने पूछा, “तो, फिल्ग्जुर के अलावा, दुष्ट रूहें और भूत भी होते हैं?”

सिग्गी ने कहा, “हां, यही जीवन है. जब हम धरती पर अपना जीवनकाल पूरा करते हैं, सब के लिये यह आसान नहीं होता कि वह आध्यात्मिक आयाम के घर का रास्ता आसानी से पा लें.”

रिक्की के पास सोचने के लिये बहुत कुछ था. उसने अपने अंकल को बौनों के साथ अपने अनुभवों के बारे में और अपने फिल्ग्जा से मिलने के बारे में बता कर राहत महसूस की थी. लेकिन इससे यह लगता था कि जटिल समस्याओं का एक नया पिटारा खुल गया था. उसे यह समझ में आना शुरू हो गया था कि जीवन में उसके अलावा और भी बहुत कुछ था जितना उसने शुरू में सोचा था.

रिक्की और सिग्गी सेल की दक्षिणी बाह्यसीमा पर पशुओं के दरवाजे पर पहुंचे और एक बजरी के रास्ते से होते हुए, जो कुछ मैदानों से आगे ले जा रहा था, फार्म की ओर बढ़े. जब वह पहुंचे तो सेल के किसान ने उनका अभिवादन किया और उन्हें गौशाला में ले गया. बैल को अपने स्टाल से उसकी नाक में पड़ी नकेल से बाहर लाया गया और गाय से पहचान कराई गई, जिसने चमत्कारिक ढंग से बैल का एक टन का भार सहन कर लिया जब वह उसके ऊपर चढ़ा तो, धक्का मारते और कराहते हुए. जब बैल का काम खत्म हो गया तो उसे दूर ले गये, और गाय को सम्भलने का मौका दिया गया. इस दौरान, किसानों और रिक्की ने दोपहर की चाय और गर्म जिंजरब्रेड कुकी, जिन्हें किसान की पत्नी ने उसी समय अपने ओवन से निकाला था, का मजा लिया. जलपान के बाद, रिक्की और सिग्गी अपनी गाय के साथ वापिस लक्जमोट की यात्रा पर निकल पड़े.

इस समय मध्य-दोपहर हो रही थी. जब वह गाय को बजरी के रास्ते से वापिस ले जा रहे थे, सिग्गी ने वार्तालाप वहीँ से शुरू किया जहाँ उन्होंने छोड़ा था और कहा,”धरती पर हमारा भौतिक संसार और अध्यात्मिक आयाम में हमारा घर-संसार, मैं जानता हूँ कि होता है. मुझे बौनों की भूमि के आयाम के बारे में कम यकीन है, यद्दपि हमारा लोकसाहित्य वैसी कहानियों से, जैसी तुमने पहले बताई थी, भरा पड़ा है. इन कहानियों में, बौने दुःख में मनुष्यों की सहायता करते हैं और मनुष्य बौनों की वैसी ही परिस्थितियों में सहायता करते हैं. बौने, हालांकि, हमेशा ही अपनी कोशिशों के बदले में कुछ चाहते हैं और यदि उन्हें वह नहीं मिलता तो बदला लेने वाले होते हैं – लेकिन वह उन्हें इनाम भी देते हैं जो उनकी सहायता करते हैं, अक्सर बहुत अच्छी तरह से, इनाम और अच्छे भाग्य के साथ.

सिग्गी ने जारी रखा, “फिर विशाल दैत्य होते हैं जो ‘अनजानी’ जगह पर रहते हैं, पहाड़ियों में बहुत दूर जहाँ मनुष्य नहीं बस सकते. कभी तुमने विशाल दैत्यों की कहानियां सुनी हैं?” रिक्की ने कहा, “मैंने ग्रिला नामक दैत्य-स्त्री और उसके पति लेप्पालुडी,32 के बारे में सुना है, जो क्रिसमस के मौके पर आते हैं उन बच्चों को थप्पड़ मारते हैं जो शरारती हैं. वह उनको चुराते हैं जो ख़ास कर बुरे होते हैं. मुझे बताया गया है कि वह उनको एक विशाल थैले में डाल कर बहुत दुर गुफा में ले जाते हैं, जहाँ वह उनको अपने भूखे बच्चों को खिला देते हैं.”

सिग्गी ने कहा, “हाँ, विशाल दैत्यों के बारे में लोककथाएँ इसाई धर्म के संधर्ष के आसपास केन्द्रित हैं जिसे लगभग 900 वर्ष पहले 1100 ईसवी के आसपास कई आइसलैंड वासियों ने अपनाया था और उन पर थोपा गया था जो इसमें ‘विश्वास नहीं करते थे’. कथाएँ सामान्यतया दैत्य-स्त्रियों का वर्णन करती हैं जो पादरियों को और ईश्वर से डरने वाले लोगों को तडपाती हैं जब वह चर्च में जाते हैं या सार्वजनिक धामिर्क उत्सवों, जैसे कि क्रिसमस, में भाग लेते हैं. हालांकि, बू-कोल्ला नामक गाय की कहानी भी है. मेरे लिये यह उचित होगा कि आज मैं इसे तुम्हे सुनाऊं. क्या तुमने यह कहानी सुनी है?”

रिक्की, जो सिग्गी के लोकसाहित्य के ज्ञान से और कहानी सुनाने के प्रेम से परिचित था, ने कहा कि उसने बू-कोल्ला नामक गाय के बारे में नहीं सुना था. लक्जमोट घर वापिस जाते हुए समय गुजारने के लिये वह एक डरावनी कहानी सुनने के लिये उत्सुक था.

सिग्गी ने अपनी कहानी शुरु की, इसे स्थानीय जिले के थल-चिन्हों में बुनते हुए और घटनाओं का अपना संस्करण जोड़ते हुए, ताकि वह इसे जितना भी संभव हो सके उतना डरावना बना सके.

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