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वर्ष: 2, अंक 21, अक्टूबर(प्रथम), 2017



मालवी गीत अपने आप में संस्कार है


राजेश भंडारी 'बाबू'


मालवा में शादी ब्याव हो या कोई भी मोको गीत गाने की परम्परा री हे | और हर गीत में एक तो टीम भावना रेवे हे के गीत एक या एक जादा बैरा आदमी मिली के गावे हे और दुसरो गीत में अपने आप में एक संस्कार हे | शादी ब्याव हो या तीज तेवार गीत हर मोका का वास्ते बन्या हे और बाई बेन होण तैयार रेवे हे मोका मोका पे गीत गाने सारु | जा एक बाई बेन गीत उगेरे वाज आस पास बेठी हुई बाई बेन होण अपना आप कने कने सरकी जावे और मुंडा पे एक ऊँगली रखी के गानों में सुर सुर में सुर मिलावा लगी जावे | दुसरो मालवी गीत में शब्द होण के चबाई चबाई के गाने को भी रिवाज हे एक एक शब्द पे जोर दी के गायो जावे हे |शादी होई तो अनाज अछो करने से शुरू हुई जावे "गणपति" | बाई बेन होण गावे चलो हो गजानन जोशी का या चला .............इना गीत का पीछे या भावना रेवे के हम हर काम भगवन की उपस्थिति में करा और शुभ काम हुई जावे | बाई बेन बड़ी भोली रेवे जेसे उनका केना से गजानन झट से उनक साते चली देगा |कम से कम ५ गनेस गानों को रिवाज हे | पाच लाडू पाय धरया ने बाबुलालजी तो पाय पद्या के नाच रे म्हारा गंपतिया .......इना गीत में एक करी के परिवार का सगला लोग को नाम लेने को मतलब हे के शादी में सब की सामूहिक रूप से जरुरत हे और सब मिली के गणपति को लाडू चड़ई रिया हे और गणपति को सामूहिक रूप से नाचने सारु भी बुलाया जय रिया हे |सबेरे उठी के "पर्बातिया " गाया जावे जीमे आसपास की सब महिला होण भेली हुई के ५ बजे सबेरे से पर्बातिया गावे हे इमे सूरज भगवन की आराधना का साते ज शादी की तय्यारी सबेरे से करने को काम रेवे और आखा परिवार को नाम लिए जावे हे गीत में की लाडा/लाड़ी का काका ,मामा,दादा,भाई,सब सूरज भगवन से उर्जा मांगे के यो काम पूर्ण हुई जावे | और तो और जदे कोई मरी जावे तो "दातन " करने में भी गीत गया जावे हे |जंवाई जद्दे सासरे आवे तो उके भी खूब गीत महिला होण भेली हुई के सुनावे हे और खूब सब का नाम ली ली के उनका लाड़ करे हे |शादी का हर गीत में नाइ,धोबी,दरजी,कुम्हार,और समाज का हर लोग को जिक्र करवा हो रिवाज हे | गणपति गावे तो चलो हो गजानन बजजया का चला तो अच्छा अच्छा कपडा मोलाना हो गजानन ..............गावे हे इसज और भी सब लोग को नाम लियो जावे हे | भाई जादे मामेरो लावे तो ..गाडो तो राड्क्यो रेत मेरे म्हारा बिराजी की चलकी पाग ....तो हर बाई बेन के ख़ुशी का आसु आई जावे हे |तेल चडाने तक का गीत शादी में गया जावे हे | लाडा /लाडी के रोज सुभे शाम कोल्या देवा का रिवाज थो जीमे सब महिला होण बारी बारी से लाडा लाडी के" पताशा" का कोल्या देता और गीत गाता जाता | एक पताशा का दोई चार बटका.....लाडा की मोटी भुवा करे दूना लटका ....ऐसे पूरा रिश्तेदार होण को जिक्र कार्यो जावे हे | लाडा लाडी के नह्वावा का टेम पे भी .....खरियल खरियल नदी बही गोरो लाडो न्हावा बेठियो हो राज .........गायो जावे हे | लाडो घोड़ी पे बेठे तो बन्ना क्यों रे खड़ो रे गुल गेरी से थारा संपत मामाजी थारे लाडला रे क्यों रे खद्यो रे गुल गेरी से ........गावे तो लाडो आखो तानी जावे | जनेऊ हो ,शादी हो ,लाडी लेवा जावो,त्येवर हो ,गामी हो ,होली हो ,दिवाली हो हर मोका का मालवी गीत हे ,पामणा आवे तो बदावो गायो जावे हे और पामणा जावे तो बिदाई | हर मोका पे गीत और हर गीत में संस्कार और रीती रिवाज ....मालवा में मालवी गीत अपने आप में पूर्ण संस्कार है |

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