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वर्ष: 2, अंक 21, अक्टूबर(प्रथम), 2017



असली चोर


शशांक मिश्र भारती


शेखर घर लौटा तो देखा कि उसका बेटा रोनी सूरत बनाये एक कोने में बैठा है।

शेखर ने उसकी मां से पूछा-क्या बात है?

‘‘आज इसने स्कूल में चोरी की है। इसलिए खाना-खेलना बन्द, रात तक ऐसे ही बैठेगा।‘‘ मां ने बताया।

‘‘ठीक है ये पैकेट अन्दर ले जाकर रख दो।’’ आफिस से लाये हुए कार्बन और कागज के पैकेट देते हुए शेखर ने कहा।

यह सब देखकर उसका बेटा सोच रहा था कि असली चोर तो............।

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