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वर्ष: 2, अंक 21, अक्टूबर(प्रथम), 2017



जमाने की मांग


कमला घटाऔरा


  
छोड़ सुसराल को
मैं लौट आई माँ
मुझे अपने आँचल में छुपा लो
मार डालेंगे वे दरिंदे मुझे
बचा लो माँ मैं भाग आई वहाँ से ।
माँ मुझे देख मुँह क्यों मोड़ती हो ?
मैंने कुछ बुरा नहीं किया ,
मैंने स्वीकार नहीं की उनकी वह अमानुषिक आज्ञा
अपने तन को उनके कहे पर औरों को सोंपने की ।
सति सतवंति रहने के संस्कार जो मेरी रूह में
सदियों से समाये हैं क्या त्याग देती मैं ?
उन नर राक्षसों के कहे
नहीं माँ ! नहीं ! !
मैंने माँ तेरी कोख से जन्म लिया है
धन के लिये जो बेच दे बहू-बेटी
ऐसे नर को गले का हार समझू
उस की जायज़ नाजायज़ इच्छा पूरी करूँ ?
मुझ से नहीं होगा माँ रूह -तन के टुकड़े टुकड़े करना ।
चिरैइयों को भी तूँ तो घोंसला बनाने देती है घर पर
क्या परित्यक्ता को ठहराने के लिये
तेरे पास घर का जरा सा कोना भी नहीं ?
तेरे आँगन में पलते हैं देख कितने दुधारू चौपाये
और घर-रक्षक श्वान ।
मुझे सेविका समझ ही अपना ले माँ ।
मैं भी तेरे संग रोजी रोटी कमाने जाऊँगी
खेतों में काम करने ले जाना मुझे भी ।
कुछ तो कहो माँ चुप क्यों हो ?
बता क्या बोलूँ बेटी ?
चुप रहने देती तो अच्छा था ।
तू सुनना ही चाहती है तो सुन ,
तेरी विदाई का कर्ज अभी उतरा नहीं
घर की जरजर हालत तो देखती है तूँ
कुछ तो सोचती इन तेरी छोटियों को
कौन अपनायेगा ?
जब तू और बोझ बढ़ाने आ बैठी
मैं दोषी बन गई हूँ बेटियों को जन्म देकर
कोख में मारने नहीं दिया कसाइयों को।
पर यह तो सोचती माँ किन मजबूरियों में जीती है
हर साँस में अंतिम पल को जाँचती है
कुछ न कह सकने पर होठ सी लेती है ।
जाने कितने पल गुजारे जाग जाग कर
तेरी परवरिश में तेरी सुरक्षा को पहरा दे देकर
भीतर के नागो से बाहर के गिद्धो ,कागों से
जो नोचने को तन तेरा ताक लगाये बैठे नापाक इरादों से ।
बोल कैसे करूँगी तेरी रक्षा आ जायें हालात वही ?
जाना तो होगा वापस तुझे मेरी लाड़ो
यह संघर्ष तेरा है ,बुलंद कर  हौंसले
भिड़ जा हर बुराई से वक्त को ले मुट्ठी में
बढ़ जा आगे चली जा सुसराल
जंग करनी होगी आर पार की
जगा ले भीतर की दुर्गा को
कर दे बुराई का अंत
बचाकर अपनी इज्जत रखने का
रास्ता तुझे खुद ही ढूंढ़ना होगा
आज जमाने की मांग यही है
हो कोई कमजोर लोग और दबाते हैं
जुल्मों सितम ढा कर धमकाते हैं , डराते हैं ।
माँ को और मजबूर ना कर
खुद को मजबूत बना
यह जीवन संग्राम है भिड़ जा बेटी
जीत हो न हो ,पर तू कमजोर ना बन।
राह दिखाये औरों को तू ऐसी मिसाल बन ।
 
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