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वर्ष: 2, अंक 21, अक्टूबर(प्रथम), 2017



दर्द से निभा लिया!


डॉ० अनिल चड्डा


 
दर्द से निभा लिया,
चैन आज पा लिया। 

सैंकड़ों ग़मों में भी,
गीत हमने गा लिया।

चाहे वो दगा करें।
आँख में बिठा लिया।

छोड़ के गये थे जो,
फिर से उन्हें बुला लिया।

आदतन थे रो दिये,
तूने क्या समझ लिया।

बात सूझती नहीं,
दिल ने सब भुला लिया।
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