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वर्ष: 2, अंक 25, नवम्बर(द्वितीय), 2017



हवाई चप्पल और हवाई यात्रा


डाॅ. कौषल किषोर श्रीवास्तव


प्रधानमंत्री जी ने माइक द्वारा पूछा ‘‘क्या तुम सब हवाई यात्रा नहीं करना चाहते हो?’’

हमारी भीड़ ‘चिल्लाई, करना चाहते हैं।’

उन्होनें फिर पूछा ‘‘ तुम में से कितने हवाई चप्पल पहनते हो?’’

सब चिल्लाये ‘‘हम सब पहनते हैं।’’

उन्होनें उद्घोषणा की कि अब हवाई चप्पल वाले भी हवाई यात्रा कर सकेंगे।

हम सब नंगे पांव वाले हवाई चप्पल पहनने निकल पड़े।

चप्पल वाला भीड़ को देख कर डर गया। पहले हम इक्के दुक्के ही उससे उधार मांगने पहुंचते थे। अब षायद संगठित होकर उधार मांगने आये हैं उसने सोचा। पर जब हमने कहा कि हम नगद लेकर ही हवाई चप्पलें खरीदने आये हैं तो उसकी खुषी का ठिकाना नहीं रहा। उसने हवाई चप्पल बनाने वालों को मन ही मन धन्यवाद दिया कि उन्होनें हवाई चप्पलों की अनुशंसा करवाई।

अब वह बड़े दुकानदारों की तरह ऐंठ कर बातें करने लगा। बोला ‘‘पंक्तिबद्ध होकर एक एक कर आओ।’’

हम एक पंक्ति में चुपचाप लग गये। उन सबमें मैं पहलवानों की तरह था इसलिये सब को धका कर और घुड़क कर सब से आगे लग गया। दुकान वाला भी आष्चर्य चकित हो गया कि यह हफ्ता वसूलने वाला नगद पैसे देकर हवाई चप्पल खरीदने आया है। उसने मुझे प्रेम से बैठाया और सही नाप की चप्पलें कम दाम में दे दीं। मैं अचरज में पड़ गया कि इतनी सस्ती चीजें भी मैं मुफ्त में लाता था। बाद में मालूम पड़ा कि भंडार में जो खराब माल पड़ा था वह भी उसने निकाल दिया। जब मैं घर आया तो सिर झुका कर घर में प्रवेश किया। सांप चाहे बाहर जितना टेढ़ा-मेढ़ा चले बिल में सीधा ही घुसता है। मेरे घर में सभी को झुक कर आना पड़ता है, क्योंकि दरवाजा ही खिड़की के बराबर है।

नई हवाई चप्पलें देखकर घर का पहलवान अर्थात पत्नि जी नाराज हो गईं। चिल्लाई ‘‘घर में सूखा पड़ा रहता है और तुम्हें हर जगह हरियाली दिख रही है। जब मैंने तुम्हारी टूटी चप्पलों की बद्धियों में टांके लगा दिये थे तब नई चप्पलें क्यों लाये? अभी ये टांका लगी पुरानी चप्पलें ही छः महीने चलतीं। तुम्हारी दादागिरी भी कम होती जा रही है। अभी भी मौका है एक छोटी मोटी दुकान खोल लो तो बुढ़ापे का सहारा हो जायेगा।"

मैनें जवाब दिया ‘‘मोदी जी ने कहा है कि अब हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई जहाज की यात्रा कर सकेंगे सो मैं नई चप्पल खरीद लाया। पुरानी चप्पल पहन कर हवाई जहाज में बैठता तो मोदी जी की इज्जत खराब नहीं हो जाती?’’

हम दोनों ने एक सिद्धांत बनाया है कि दोनों तब तक लड़ते रहेंगे जब कि कोई बीच-बचाव नहीं करता। पर जब कोई बीच बचाव करने आ जाता है तो दोनों आपस की लड़ाई छोड़कर उससे लड़ने लगते हैं।

छिंदवाड़ा बस स्थानक वाले दलाल आश्चर्यचकित थे कि बगैर छीना झपटी के बहुत सारी सवारियां खुद ही नागपुर के लिये चढ़ गईं। यहां दादा की तरह खड़ी रहने वाली बसें नागपुर में पिद्दी की तरह एक तरफ खड़ी हो जाती हैं। मैंने बस वाले को घुड़का ‘‘हमें भीम राव अंबेडकर हवाई अडडे पर छोड़ो। हम सबने हवाई चप्पलें हवाई जहाज का सफर करने के लिये खरीदीं है। पैदल जायेंगे तो एक तो चप्पल गंदी हो जायेंगी और दूसरे हवाई जहाज है, हमारे लिये रूकेगा थोड़ी ही।

बस वहीं नाके पर रोक दी गई। हम सब पंक्तिबद्ध उतरे तो हमें देखकर तलाशी लेने लगे। हवाई जहाज हमारी मोटरों की तरह बगैर डर के नहीं खड़े रहते। कई सुरक्षा चक्र के किलो में खड़े रहते हैं। वह सुरक्षा कर्मी हम सब हवाई चप्पल धारियों को देखकर घबरा गया। उसने हमसे हमारे टिकिट पूछे। हमने समवेत पूछा ‘‘तो क्या यहां ट्रेनों या बसों की तरह टिकिट खिड़कियां नहीं है?’’

वह हंस कर बोला ‘‘है तो। मोदी जी ने कहा जरूर है कि हवाई चप्पल वाले भी हवाई जहाज की यात्रा कर सकेंगे पर यह नहीं कहा कि टिकिट सस्ते हो गये है। अरे, जब त्योहारों में मोटरों के टिकिट ही तिगुनें दामों पर मिलते हैं तो फिर तो ये हवाई जहाज है। तुम सब एक पंक्ति में ही टिकिट खिड़की तक जाना।

हम सब पंक्तिबद्ध ही हवाई चप्पलें चटखाटे हुये टिकिट खिड़की तक पहुंचे। मैनंे वहां पहुंच कर मुम्बई का टिकिट पूछा। उसनें हमें ऊपर से नीचे देखा फिर टाई ठीक करते हुये बोला ‘‘अभी हमारी कम्पनी कमीषन दे रही है। एक टिकिट की कीमत तेरह हजार रूपये है, हमारे पैरों के नीचे जमीन तो थी ही नहीं जो खिसकती, न होते हुये भी हमारे हाथों के तोते उड़ गये। हमने प्रतिरोध करते हुये कहा ‘‘इतने मंहगे टिकिट। मगर प्रधानमंत्री जी ने तो कहा है कि हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई जहाज की यात्रा कर सकेंगे।’’ ‘‘तो करो न’’ वह बोला ‘‘मगर टिकिट लेकर।’’ ये रेलगाड़ी नहीं है जिसमें तुम लोग बगैर टिकिट यात्रा कर सको या टी.टी.आई को कुछ पैसे देकर सरकार को चूना लगा सको।

मैंने रंगदारी दिखाई। अकड़कर कहा मैं छिन्दवाड़ा के बरारीपुरा में हफ्ता वसूली करता हूँ समझे। वह समझ गया उसने सुरक्षा कर्मी को इशारा किया तीन चार सुरक्षा कर्मियांे ने मुझे दबोंच लिया। मेरे बाकी साथी उल्टे पांव भाग लिये, और सारे टिकिट कांऊटर मुझे मुंह चिढ़ाकर हंसनें लगे।

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