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वर्ष: 2, अंक 25, नवम्बर(द्वितीय), 2017



ग़ज़ल -
कुछ तो ख़याल कर


प्राण शर्मा


यारों से मुँह को मोड़ना कुछ तो ख़याल कर 
बरसों की यारी तोड़ना  कुछ तो ख़याल कर 

अपनों से गाँठ तोड़ना  यूँ ही सही मगर 
ग़ैरों से गाँठ जोड़ना कुछ तो ख़याल कर 

जग का ख़याल कर भले ही रात - दिन मगर 
घर का ख़याल छोड़ना कुछ तो ख़याल कर 

उनके भी दिल धड़कने दे दिल की तरह तेरे 
नित डालियाँ झंझोड़ना कुछ तो ख़याल कर 

माना कि ज़िंदगी से परेशान है तू पर 
पत्थर से सिर को फोड़ना कुछ तो ख़याल कर 

जो कर गए हैं काम जहां में बड़े - बड़े 
नाम अपना उनसे जोड़ना कुछ तो ख़याल कर 

हाथों में तेरा हाथ लिया है किसीने ` प्राण `
झटका के हाथ दौड़ना कुछ तो ख़याल कर 
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