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वर्ष: 2, अंक 25, नवम्बर(द्वितीय), 2017



बचपन


प्रिया देवांगन "प्रियू"


 
छोटे छोटे बच्चे हैं हम , मिलजुल कर सब रहते हैं ।

खेल खेल में भले झगड़ ले , भेदभाव नहीं करते हैं ।

पढ़ लिखकर विद्वान बनेंगे, नया इतिहास रचायेंगे ।

नये नये सृजन कर हम , भारत को स्वर्ग बनायेंगे ।

छोटे हैं तो क्या हुआ, हममें भी समझदारी है ।

भारत माता के प्रति, हममें भी जिम्मेदारी है ।

नहीं झुकने देंगे तिरंगा, चाहे जो कुछ हो जाये ।

अड़े रहेंगे अपनी जगह पर, चाहे तूफान आ जाये।
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