Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 24, नवम्बर(प्रथम), 2017



प्रेमचंद की रचना को नाटककार की
ऐनक से देखने का परिणाम


अखतर अली


मुरारी बापू का रामायण पाठ है ईदगाह, उस्ताद नुसरत फतेह अली का सूफी गायन है ईदगाह ,बिस्मिल्लाह खां की शहनाई है ईदगाह ,पंडित भीमसेन जोशी का अलाप है ईदगाह ,उस्ताद अल्लारखा खां का तबला है ईदगाह, पंडित रवि शंकर के सितार की तान है ईदगाह , बड़े गुलाम अली खां की भैरवी है ईदगाह , महबूब खां की मदर इंडिया है ईदगाह |

आपको कोई अच्छी कहानी की तलाश है तो ईदगाह पढ़िये ,आप कहानी लिखना सीखना चाहते है तो ईदगाह पढ़िये , स्नेह और त्याग का रूप देखना चाहते है तो ईदगाह पढ़िए , रिश्तो का महत्व जानना है तो ईदगाह पढ़िये , कहानी में नरेशन की मात्रा और महत्व जानना चाहते है तो ईदगाह पढिये ,कहानी में दृश्य देखना है तो ईदगाह पढिये , कहानी का आरम्भ ,मध्य और अंत किस तरह होना चाहिये इस की तलाश है तो ईदगाह पढिये ,कहानी में रिदम पैदा करने की तरकीब जानना है तो ईदगाह पढ़िये , न लिखे को पढना है तो ईदगाह पढिये ,गरीबी को महत्वहीन साबित करना है तो ईदगाह पढिये ,प्रेम को स्थापित करना है तो ईदगाह पढिये ,साहित्य का सौन्दर्य परखना है तो ईदगाह पढ़िये , कथाकार की सामाजिक जिम्मेदारी जानना है तो ईदगाह पढिये ,पात्रो को गढ़ना सीखना है तो ईदगाह पढ़िये ,कहानी की गहराई को जानना है तो ईदगाह पढिये ,साहित्य का मनोविज्ञान समझना है तो ईदगाह पढिये ,साहित्य का समाज शास्त्र जानना है तो ईदगाह पढिये,साहित्य का मनोविज्ञान जानना है तो ईदगाह पढिये , कहानी में कविता की नाज़ुकी चाहिये तो ईदगाह पढिये ,कहानी में संगीत की कशिश चाहिये तो ईदगाह पढिये ,कहानी में मिट्टी की सौंधी खुशबू चाहिए तो ईदगाह पढिये ,बाल्यकाल की सच्चाई जानना है तो ईदगाह पढिये , वृद्ध अवस्था की ज़िम्मेदारी सीखना है तो ईदगाह पढिये , जीवन को जीने लायक बनाना है तो ईदगाह पढिये ,जीवन को ईदमय बना देना है तो ईदगाह पढिये , त्योहारों का अर्थ समझना है तो ईदगाह पढिये ,मुस्कान की महत्ता जानना है तो ईदगाह पढिये ,आंसू की कीमत जानना है तो ईदगाह पढिये ,कहानी में संवाद चाहिए तो ईदगाह पढिये ,कहानी में दृश्य चाहिए तो ईदगाह पढिये ,कहानी में वेशभूषा देखना है तो ईदगाह पढिये |

हुजुर ये कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानी ईदगाह है , इसे पढना है तो नहा धोकर वजू बना लीजिये ,नये कपडे पहन लीजिये ,जेब में पचीस पचास रूपये भी रख लीजियो , ये प्रेमचंद की लेखनी है ये आपको कमरे से निकाल कर ईदगाह तक ले के जाएगी ही जायेगी वहाँ हामिद मिलेगा तो उसे इदी नहीं दीजिएगा क्या ?

www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें