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वर्ष: 2, अंक 24, नवम्बर(प्रथम), 2017



प्यार


श्रद्धा मिश्रा


प्यार में सब कुछ बर्बाद हो जाता है, प्यार करना ही नही चाहिए, लाइफ ही बेकार हो जाती है, नमन ने मीना को देखकर कहा।

मीना ने चुपचाप ट्रे उठायी और रसोईघर में चली गयी। ये कोई आज की बात नही थी जो मीना रोती या कुछ रियेक्ट करती। प्यार तो मीना ने भी किया है नमन से,मगर मीना ऐसा नही सोचती थी उसे भरोसा था कि उसका प्यार कभी नमन को हारने नही देगा।

इस बात को अभी तीन दिन ही बीते थे कि नमन को एक लेटर मिला। नमन बहुत खुश था उसने मीना को खुशी से उठा लिया और बोला देखा माँ की दुआ पूरी हो गयी। पापा का सपना सच हो गया आज मैं बहुत खुश हूँ। तीन दिन बाद जॉइनिंग है मीना, दादी का आशीर्वाद है ये उन्होंने इस बार कहा था कि तुझे नौकरी जरूर मिलेगी।

मीना भी नमन के लिए शॉपिंग लिस्ट बनाने लगी उसकी जरूरत का सब समान लगाया उसे पता भी नही चला कि तीन दिन कब बीत गए आज नमन को निकलना था।

मीना नमन के साथ स्टेशन तक गयी। नमन ट्रेन में बैठ गया मीना ने भारी आंखों से नमन को देखा। अभी नमन और मीना की शादी नही हुई थी फिर भी दोनों का रिश्ता ऐसा था जैसे सालो से पति और पत्नी हों।

ट्रेन चली गयी मीना खड़ी रही नमन का कॉल आया मीना को लगा शायद अब नमन उसके लिए कुछ कहेंगे,मीना ने आँशु पोछ के कॉल रिसीव किया। मीना मैं तो भूल ही गया तुम अब अकेले क्या करोगी यहाँ, ऐसा करो अपने घर चली जाओ। अब वही तैयारी करना। कोचिंग तो वैसे भी अब पुरी हो चुकी है।

मीना ने स्टेशन से बाहर आके ऑटो किया। और खुद से कहा नमन कोचिंग तो 1 साल पहले ही खत्म हो चुकी थी। उसे याद आया कि 1 साल पहले जब वो हार चुकी थी कि अब शायद ही उसे सरकारी नौकरी मिल पाये तो वो अपना रूम छोड़कर नमन के साथ शिफ्ट हो गयी। उसने नमन के साथ मिलकर फैसला किया कि अब वो नमन की जॉब के लिए जी जान लगा देगी।और एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ा लेगी। तब से नमन ने शायद एक गिलास पानी भी ले कर पिया हो, सुबह उठने से शाम तक मीना ने नमन के पीछे लगा दिए। आज उसे माँ की दुआ दादी के आशीर्वाद से नौकरी मिल ही गयी। प्यार से उसकी जिंदगी बर्बाद हो गयी थी।

ऑटो से उतर कर मीना का शरीर कमरे तक पहुँच गया। आज उसे पहली बार नमन की बात सच मालूम हुई प्यार में जिंदगी बर्बाद हुई! मगर किसकी?

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