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वर्ष: 2, अंक 24, नवम्बर(प्रथम), 2017



कैसे हो गजानन


सुशील शर्मा


 
कैसे हो गजानन अबकी साल।
भारत में तो मचा है धमाल।

जी एस टी से व्यापारी हैं बेहाल।
दलालों की नही गल रही है दाल।
जमाखोरों का हुआ जीना मुहाल।
औरतों के कट रहे चोटियों के बाल।
राम रहीम पर पड़ा सीबीआई का जाल।
कैसे हो गजानन अबकी साल।
भारत में तो मचा है धमाल।

पाकिस्तान कर रहा हरदम घात।
चीनी चाउमीन से न बन रही बात।
भारत से खा कर हरदम मात।
दोनों घुड़क रहे दिन और रात।
डोकलाम में मचा बबाल।
चीनी चूहे करें सवाल।
कैसे हो गजानन अबकी साल।
भारत में तो मचा है धमाल।

तीन तलाक अब हुआ खलास।
मुस्लिम बहिनें हुईं पलास।
बेरोजगारी की दर है खास।
पप्पू अभी नही हुआ है पास।
टमाटर दहक कर हुआ है लाल।
प्याज सिमट कर हुई बेहाल।
कैसे हो गजानन अबकी साल।
भारत में तो मचा है धमाल।

अन्नदाता खा रहा है गोली।
 रोटी इठला कर बोली।
नेट है सस्ता महंगी गोली।
मस्त है मजदूरों की टोली।
दिन में काम का नहीं मलाल।
मोबाइल से रोटी का सवाल।
कैसे हो गजानन अबकी साल।
भारत में तो मचा है धमाल।

इस बार गजानन कुछ कर जाना।
ऑक्सीजन के सिलेंडर भर जाना।
बंद हो जाये बच्चों का मर जाना ।
विश्वास से सब मन भर जाना।
भारत में सब हों खुशहाल ।
जीवन में सब हों मालामाल।
कैसे हो गजानन अबकी साल।
भारत में तो मचा है धमाल।



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