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वर्ष: 2, अंक 24, नवम्बर(प्रथम), 2017



डॉ० रिक लिंडल द्वारा रचित अंग्रेजी पुस्तक 'The Purpose'
के हिंदी अनुवाद का अगला भाग
[.....पिछले अंक से] अध्याय 2
"बू-कोल्ला की कहानी"


लेखक: डॉ० रिक लिंडल
अनुवादक: डॉ० अनिल चड्डा


एक बार एक किसान अपनी पत्नी और इकलौते बेटे के साथ कोट में रहता था – छोटा सा फार्म जहाँ तुम रविवार को अपने मित्र से मिलने जाते हो. उनके पास केवल एक गाय थी, जिसका नाम बू-कोल्ला था. कहानी तब शुरू हुई जब एक दिन बू-कोल्ला ने बछड़ा दिया. बाद में, उसी दिन, बू-कोल्ला और बछड़ा गायब हो गये, और वह कहीं भी नहीं मिल रहे थे. किसान और उसकी पत्नी द्वारा उसे दूर-दूर ढूंढने के बाद, जिसका कोई फायदा नहीं हुआ, उन्होंने अपने इकलौते पुत्र को कुछ खाने के इंतजाम के साथ और एक नये जूते के जोड़े के साथ अनजाने स्थान पर गाय और उसके नये पैदा हुए बछड़े को ढूंढने के लिये भेजा. बेटा बहुत दूर तक और व्यापक चला – घाटियों से और दलदल और पहाड़ो से – जब तक वह पहाड़ी इलाके में अंदर तक नहीं चला गया. तब तक वह थक गया था, इसलिये वह बैठ गया और माता-पिता द्वारा तैयार किये गये खाने में से कुछ खाया. जब उसने पेट भर कर खा लिया तो वह खड़ा हो गया और बुलाया, “रंभाओ अब, बू-कोल्ला, अगर तुम कहीं पर जीवित हो तो.” उसने गाय को कहीं दूर से रंभाते हुए सुना. वह उस दिशा में कुछ देर तक चला और फिर दोबारा कुछ खाने के लिये बैठ गया. बाद में, उसने फिर खड़ा हो कर बुलाया, “रंभाओ अब, बू-कोल्ला, अगर तुम कहीं पर जीवित हो तो.” उसने गाय को फिर से पहले वाली जगह से कुछ नजदीक रंभाते हुए सुना. वह कुछ घंटे तक चला और तीसरी बार बैठ गया, इस बार थीफ फेल्ल34 नामक एक बड़े पर्वत कि चोटी पर जो आइसलैंड के मध्य भाग में लॉन्ग ग्लेशियर35 और किंग्स पैलेस ग्लेशियर36 के मध्य स्थित है. कुछ आराम और खाने के बाद वह खड़ी पहाड़ी के किनारे पर खड़ा हो गया और तीसरी बार बुलाया, “रंभाओ अब, बू-कोल्ला, अगर तुम कहीं पर जीवित हो तो.” उसको आश्चर्यचकित करते हुए, उसने गाय को अपने पैरों के नीचे रंभाते हुए सुना. जब उसने आसपास देखा, उसने भेड़ों की एक पगडण्डी देखी जो उसे पर्वत की उत्तरी दिशा में चट्टान के किनारे पर ले जाती था. वह उस रास्ते पर गया जब तक वह एक गुफा के पास नहीं पहुँच गया, जहाँ उसने बू-कोल्ला को एक स्टाल पर रस्सी से बंधा हुआ पाया. गाय के पास के बड़ा हंडा था जिसमें कुछ सूप बचा हुआ था जिसे हाल ही में समाप्त किया गया था, जिसमें एक बछड़े की हड्डियाँ भी थी. गुफा में और पीछे, वह देख सकता था कि एक विशाल दैत्य-स्त्री और उसकी बेटी सोए हुए थे और जोर-जोर से खुर्राटें ले रहे थे. लड़के ने अनुमान लगाया कि दैत्यों ने बू-कोल्ला के बछड़े को मार दिया था और फिर उसका सूप बनाया था और फिर गाय का दूध निकाल कर पौष्टिक दूध, जो बछड़े के लिये था, पीया था. निस्संदेह अपने अगले भोजन के लिये उनकी योजना बू-कोल्ला को मारने की भी थी.

लड़के ने चुपचाप गाय को खोला और उसे चट्टान के किनारे ले गया और जितना भी तेज गाय चल सकती थी उतनी तेजी से घर की ओर चल पड़ा. जब वह कुछ दूर चला गया, तो उसने मुड़ देखा कि दो विशाल दैत्य-स्त्रियाँ चट्टान के किनारे पर आ गईं थी और उसकी ओर आ रहीं थी. जब दौड़ते हुए उनके कदम जमीन पर पड़ते थे तो वह तूफान की भांति आवाज कर रहे थे. उसे समझ में आ गया कि अपनी विशाल छलांग के साथ, वह उस तक जल्दी ही पहुँच जायेंगी. इसलिये उसने कहा, “मेरी प्यारी बू-कोल्ला, अब हम क्या करें?”

बू-कोल्ला ने उत्तर दिया और कहा, “मेरी पूंछ से एक बाल लो, और उसे जमीन पर डाल दो.” उसने यह किया, और बू-कोल्ला ने बाल से कहा:

“यह मैं डालती हूँ, और यह मैं कहती हूँ
एक प्रबल झील बन जाओ, मैं प्रार्थना करती हूँ
कि केवल चिड़ियाएँ इस ओर उड़ कर आ सके.”

बाल एकदम से झील में परिवर्तित हो गया. जब दैत्य-स्त्रियाँ झील के पास आईं, बड़ी वाली ने लड़के से कहा चिल्ला कर कहा, “इससे कुछ नहीं होगा, और जल्दी ही मैं बू-कोल्ला को वापिस ले लूंगी.” फिर उसने अपनी बेटी से कहा,”घर वापिस जाओ और अपने पिता का बड़ा बैल ले कर आओ.” दैत्य-लड़की भाग कर गई और जल्दी ही एक विशाल बैल के साथ लौट आई, जिसने, तत्काल ही, झील का पानी पी लिया.

लड़के ने पीछे मुड़ कर देखा और पाया कि दैत्य फिर से उसके पीछे भाग रहे थे और जल्दी ही उसे दोबारा पकड लेंगी. इसलिये उसने कहा,”मेरी प्यारी बू-कोल्ला, अब हम क्या करें?”

बू-कोल्ला ने उत्तर दिया और कहा, “मेरी पूंछ से एक बाल लो, और उसे जमीन पर रख दो.” उसने ऐसा ही किया, और बू-कोल्ला ने बाल से कहा:

“यह मैं डालती हूँ, और यह मैं कहती हूँ
एक प्रचंड अग्नि बन जाओ, मैं प्रार्थना करती हूँ
कि केवल चिड़ियाएँ इस ओर उड़ कर आ सके.”

और तत्काल ही, बाल एक प्रबल अग्नि में पारिवार्तित हो गया. जब दैत्य-औरत अग्नि के पास आई तो बड़ी वाली ने लड़के से चिल्ला कर कहा, “इससे कुछ नहीं होगा, और जल्दी ही मैं बू-कोल्ला को वापिस ले लूंगी.” फिर उसने अपनी बेटी से कहा,”घर वापिस जाओ और अपने पिता का बड़ा बैल ले कर आओ.”दैत्य-लड़की भाग कर गई और जल्दी ही एक विशाल बैल के साथ लौट आई. बैल ने जो झील का पानी पीया था उसे आग के ऊपर पेशाब करके आग को बुझा दिया. दैत्य फिर लड़के के पीछे भागने लगे, अब एक पहाड़ी की चोटी से दूसरी चोटी तक लम्बी छलांगे लगाते हुए, आनंद से खिलखिलाते हुए, यह सोच कर कि उन्होंने लड़के को मात दे दी थी.

लड़का जल्दी-जल्दी पहाड़ी मैदानों से होते हुए, नीचे वाटर वैली37 के रास्ते,जो झाड़ी घाटी के पूर्व में है, जहाँ लक्जमोट स्थित है, अपने घर की ओर कोट झाड़ी घाटी से होते हुए जाने की सोच रहा था. फिर भी, जब उसने वाटर वैली में प्रवेश किया, तो उसने देखा कि दैत्य-स्त्री स्वाइन पहाड़38, जो घाटी के सामने था, के पहाड़ी टीले पर खडी थी. उन्होंने घाटी में इतनी ज्यादा मात्रा में पेशाब कर दिया था कि धीमी धारा, जो घाटी से बहती थी, के किनारे उफ़न रहे थे और तीव्रता से बहने लगे थे, जिससे लड़के और बू-कोल्ला के लिये आगे बढ़ना जोखिम भरा हो गया था.

एक बार फिर, लड़के ने पूछा,”मेरी प्यारी बू-कोल्ला, अब हम क्या करें?”

बू-कोल्ला ने उत्तर दिया और कहा, “मेरी पूंछ से एक बाल लो, और उसे जमीन पर रख दो.” उसने ऐसा ही किया, और बू-कोल्ला ने बाल से कहा:

“यह मैं डालती हूँ, और यह मैं कहती हूँ
एक प्रचंड बिजली और तूफान बन जाओ, मैं प्रार्थना करती हूँ
कि केवल चिड़ियाएँ ही इस ओर उड़ कर आ सके.”

और तत्काल ही, बाल बिजली और तूफान बन गया, जिससे बिजली की गाज बहते पानी पर पड़ने लगी. बिजली की गाज के झटकों ने दैत्यों को उनकी पीठ के बल गिरा दिया, और तूफान के डर ने उन्हें पीछे हटने के लिये मजबूर कर दिया. लड़के ने अब बड़ी दैत्य को व्यथा में चिल्लाते हुए सुना, “इससे कुछ नहीं होगा, और जल्दी ही मैं बू-कोल्ला को वापिस ले लूंगी.”

घाटी अब चलने लायक हो गई थी, और लड़का वाटर वैली के रास्ते होते हुए कोट में अपने घर की ओर बढ़ा. कुछ घंटों के बाद दैत्य ठीक हो गये और फिर से उनकी तरफ भागना शुरू कर दिया. लड़के की बू-कोल्ला के साथ घर की ओर यात्रा खत्म होने वाली थी, और वह फार्म लक्जमोट को देख पा रहा था, उसके दाहिने हाथ की ओर और उसके घर, कोट, से कुछ ही दूरी पर, आगे कुछ रास्ते पार करके. लड़के ने पीछे मुड़ कर देखा और पाया कि दैत्य जल्दी ही उसके नजदीक पहुँच जायेंगे, क्योंकि वह लम्बी छलांगो के साथ तूफानी चाल से आ रहे थे. इसलिये, एक बार फिर, उसने कहा,”मेरी प्यारी बू-कोल्ला, अब हम क्या करें”

बू-कोल्ला ने उत्तर दिया और कहा, “मेरी पूंछ से एक बाल लो, और उसे जमीन पर रख दो.” उसने ऐसा ही किया, और बू-कोल्ला ने बाल से कहा:

“यह मैं डालती हूँ, और यह मैं कहती हूँ
एक ऊँचा पहाड़ बन जाओ, मैं प्रार्थना करती हूँ
कि केवल चिड़ियाएँ ही इस ओर उड़ कर आ सके.”

और तत्काल ही, बाल एक बहुत बड़े पहाड़ में परिवर्तित हो गया जो झाड़ी घाटी पहाड़ के नाम से जाना जाता है और शान से लक्जमोट के पीछे खड़ा है. जब दैत्य पहाड़ के पास आये, बड़ी वाली ने लड़के से पुकार कर कहा, “इससे कुछ नहीं होगा, और जल्दी ही मैं बू-कोल्ला को वापिस ले लूंगी.” उसने फिर अपनी बेटी से कहा,”अपने पिता की बड़ी छेद करने वाली ले कर आओ, और हम पहाड़ में छेद कर देंगें.” फिर उसने इसके अतिरिक्त कहा, ”बड़ा सूप वाला हंडा लाना मत भूलना, क्योंकि इस कठिन दिन के बाद लड़का स्वादिष्ट भोजन साबित होगा. दैत्य-लड़की भाग कर घर गई और अपने पिता की छेद करने वाली और सूप के हंडे के साथ लौट आई, जिसके बाद दैत्य-स्त्री ने पहाड़ में छेद करना शुरू कर दिया. वह जल्दी ही छेद में से दूसरी ओर देख पा रही थी, जहाँ लड़का और बू-कोल्ला लगभग हरियाली के पास, जिसने कोट को घेर रखा था, पहुँच चुके थे. इस पर, वह इतनी बेसब्र हो गई कि उसने छेद करने वाली को फेंक दिया और खुद को ऐंठ कर छेद में घुसा लिया, दूसरी ओर अपनी बाहें बढ़ाते हुए, जब कि दैत्य-लड़की पैरों से उसे धक्का दे रही थी. लेकिन छेद बहुत छोटा था, और दैत्य-स्त्री फंस गई और पत्थर में बदल गई. यह सब देख कर, दैत्य-लड़की रोने लगी, और अपने पिता के पास हंडे और छेद करने वाली के साथ वापिस लौट गई.


पत्थर में परिवर्तित विशाल बैल (फोटोग्राफर:ब्रागी इन्गीबर्गसन/
बीआरआईएन एचटीटीपी://ब्रिन.एलवाई.काम)

कुछ समय बाद, एक मैदान में चरते हुए, बू-कोल्ला ने एक विशाल बैल को चौड़ी फ्जोर्ड के किनारे, जो कुछ ही दूरी पर था, पानी पीते हुए देखा. यह याद करते हुए कि उस बैल ने कितना खतरा पैदा कर दिया था जब उसने उसके जादू को विफल करने के लिये लगाया था, बू-कोल्ला ने अवसर का लाभ उठाते हुए अपने जादू की माया से बैल को पत्थर में बदल दिया. आज तक, बैल का चालीस फुट ऊंचा प्रतिबिम्ब अभी भी उनको स्पष्ट दिखाई देता है जो इस फ्जोर्ड39 के किनारे के पास से गुजरते हैं.

जब तक सिग्गी ने अपनी कहानी समाप्त की रिक्की और सिग्गी लगभग घर पहुँच चुके थे और, जैसे ही फार्म की ओर जाने वाले रास्ते से गुजरे, सिग्गी ने अपनी कहानी को समाप्त करते हुए रिक्की से कहा कि उसके दादा, जो एक भूविज्ञानी थे और झाड़ी घाटी पहाड़ में भूगर्भीय विन्यास पर शोध करते थे, ने उस स्थान की खोज की थी जहाँ पर दैत्य के हाथ और कलाईयाँ चट्टान के किनारे से बाहर निकल रही थीं, पहाड़ के सामने आधी दूरी ऊपर तक, और उन्होंने यह भी खोज की थी कि दैत्य के पंजे और पैर दूसरी तरफ निकलते हुए कहाँ पर देखे जा सकते थे.

सिग्गी ने रिक्की से कहा, “तुम किसी समय पहाड़ की दूसरी तरफ जा सकते हो और इस सबूत की जांच कर सकते हो, यदि तुम में हिम्मत है तो.” रिक्की और सिग्गी ठीक शाम के दूध निकालने के समय पर पहुँच गये. यह कहानी सुनने के बाद, रिक्की अक्सर झाड़ी घाटी पहाड़ पर यह देखने के लिये गया कि क्या वह उस जगह का ठीक तरह से पता लगा सकता था कि दैत्य-स्त्री के हाथ पहाड़ के सामने चट्टानों की बनावट के बीच में कहाँ देखे जा सकते थे, लेकिन उसने कभी उसके पैर और पंजों को दूसरी ओर देखने जाने का जोखिम नहीं उठाया.

फार्म पर जीवन अपने सामान्य रूप से चल रहा था. सितम्बर बीत गया था. भेड़ों को पहाड़ी मैदान से इकट्ठा किया गया, और छोटी भेड़ों को उनकी माँ से अलग करके लगभग सभी को बूचड़खाने भेज दिया गया. अक्तूबर में घोड़ों को पहाड़ी मैदान के दलदल से हांक दिया गया, और ज्यादातर बच्चों को भी बूचड़खाने, कीमती धोड़े के मॉस के लिये, भेज दिया गया. आइसलैंड में घोड़े का मांस लोकप्रिय मांस था, और रिक्की का परिवार सामान्यतया एक पूरे बच्चे को खरीद लेते थे, जो उसकी माँ फ्रीजर में रखने के लिये तैयार करती थी.

इस समय पर, गायों को रात को अंदर रखा जाता था, जमीन के पाले के कारण, इसलिये रिक्की को उन्हें सुबह लाना नहीं पड़ता था. रिक्की के लिये पतझड़ वर्ष का दोनों ही सुंदर और विषादपूर्ण समय था. वह अपने पिता के फार्म पर आने और उसे रिकिविक वापिस ले जाने से पहले दिन गिनने शुरू कर दिया करता था – और स्कूल का एक और वर्ष.

निश्चय ही यह गर्मियां रोमांच से भरी हुई थी. रिक्की के ज्ञान की सीमा जितनी वह कल्पना कर सकता था उससे ज्यादा बढ़ गई थी, जिसमें बौनों और दैत्यों की कहानी शामिल थी, और साथ ही साथ अध्यात्मिक आयाम का ज्ञान. एक आत्मा होते हुए जो कभी मर नहीं सकती, एक आत्मा जिसने कई जीवन जीये थे, और एक आत्मा जो एक ही साथ अध्यात्मिक आयाम और धरती पर रहते हैं, ने उसकी सहजज्ञान भावना को बनाया. और, जीवन को भौतिक आयाम में अपने बारे में कुछ सीखने के उद्देश्य से एक अस्थाई यात्रा की भान्ति देखते हुए बहुत कुछ अर्थ भी बनाये थे.

रिक्की के लिये, एक शान्ति और एक अध्यात्मिक यथार्तता की अनुभूति उत्पन्न होनी शुरू हो गई, और उसके जीवन में पहली बार यथार्थ में आने की शुरुआत हो गई. उसने देखा कि वह अपने हकलाने को और अच्छे से तरीके काबू कर पा रहा था और हीथर हिल्ल पर पुरानी आत्मा से मुलाकात के बाद उसका आत्मविश्वास बढ़ना शुरू हो गया था. विरोधाभास ढंग से, यह स्वीकार करने का अनुभव कि उसने स्वयं अपने हकलाने को चुना था उसके अंदर एक आंतरिक शान्ति को ले कर आया और यह स्वीकारोक्ति कि जीवन में संघर्ष उसे मजबूत बना सकता था.

रिक्की ने यह भी एहसास किया कि उसके पढ़ने लिखने की समस्या ने उसे अलग कर दिया था. उसे सात वर्ष की आयु में कक्षा की ‘ओ’ श्रेणी के बद्यार्थियों में रख दिया गया था और बारह वर्ष की आयु तक उसी श्रेणी में रहा. उसके स्कूल में कक्षाओं की केवल चार श्रेणियां थीं: ‘ए’ कक्षा, ‘बी’ कक्षा, ‘सी’ कक्षा, जिसके बाद ‘ओ’ कक्षा आती थी. रिक्की अक्सर सोचता था कि ‘डी’ कक्षा, या ‘ई’ कक्षा, इत्यादि का क्या हुआ था? ‘सी’ अक्षर के बाद कोई और कक्षा क्यों नहीं थी, अचानक ही ‘ओ’ कक्षा थी? ईश्वर का शुक्रिया है, कोई ‘एक्स’, ‘वाई’ या ‘जी’ कक्षा नहीं थी. वह उसके लिये एक बहुत ही बुरा स्थान होता !

‘ओ’ कक्षा में होना, यद्दपि, रिक्की के लिये ठीक था. इन वर्षों के दौरान, उसने धीरे-धीरे अपने सहपाठियों से, और दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों से, मिलना-जुलना शुरू कर दिया और उसने कुछ अच्छे मित्र बनाये. और अब, जो कुछ पुरानी आत्मा ने उससे जीवन के एक यात्रा होने के बारे में जो कुछ भी कहा था उस बात को देखते हुए उसे जल्दबाजी न करने और चिंता पर काबू करने की स्वतंत्रता दी. वह जानता था कि अंततः सभी कुछ ठीक होगा, और उसने अपने मन की शान्ति को पाना और अपनी पढाई पर केन्द्रित होना और गृहकार्य पर जुटना शुरू कर दिया. जैसे-जैसे पतझड़ से शरद ऋतु तक महीने गुजरते गये, उसने देखा कि उसका हकलाना लगभग खत्म हो गया था. वह अपनी पढने-लिखने की समस्या को भी ठीक तरह से काबू कर पा रहा था, और उसके पढने की क्षमता बढ़ गई थी. उसे कम डर लगता था; वह अलग और अकेला कम महसूस करता था.

[क्रमशः........(अगले अंक में पढ़ें अध्याय 3 -"होलर फॉर्म")]
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