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वर्ष: 1, अंक 9, मार्च, 2017



देवभूमि और व्हाटसएप

सुदर्शन कुमार सोनी


भारत देव भूमि है , ऋषियो मुनियो ने यहां लम्बे समय तक तपस्या की है , यहां बडे़ बडे़ संत महात्मा , उपदेषक , प्रवचक हुये है और आज भी यहां गली कस्बे ष्षहरो मे किसी न किसी धर्म का कोई न कोई साधु , महात्मा , पंडित , मौलवी , पादरी उपदेष देते आपको मिल जायेगा । चैनल खोलो तो सबसे पहले उपदेषक चैनल के ही दर्षन होते है । कोई नम्बर के आधार पर ,तो कोई राषि के आधार पर , तो कोई बिना राषि के अच्छी खासी राषि लेकर उपदेष देता रहता है । इन सारे उपदेषो के पीछे एक ही उद्देष्य विद्यमान दीख पड़ता है ! व्यक्ति का , समाज का , देष का , विष्व का कल्याण । यहां कल्याण की कामना करने वाले कूट कूट कर भरे हुये है । बस मे रेल मे हर जगह एक दूसरे को उपदेष देते लोग , देष समाज कैसे मजबूत बनेगा और किन किन बातो से कमजोर हो रहा है इसी का गान करते आबाल , वृद्व , नारी सब दीख पड़ते है ।

गंगू जो कहना चाह रहा है उसकी थाह आप ने आषा है लेना षुरू कर दी है। आज नये नये गजटस व नये नये एपस् आते जा रहे है इनमे से एक है व्हाटस एप ये जो न करे कम है । विगत माह भारत भवन मे एक नाटक मुझे भी षिकायत है मे भी डिस्पैच बाबू बडे़ बाबू से पीड़ित होकर कहता है कि मुझे धमकी देने की कोषिष नही करना तुम्हारी सारी हरकते मै व्हाटएप मे डाल दूंगा और पूरे समूहो मे फैला दूंगा !

व्हाटस एप के संदेष देख कर एक ही संदेष मिल रहा है कि किसी सयान सदस्य ने यदि कोई उपयोगी संदेषा या नुस्खा या समाचार , घटना , कहानी , फोटोगा्रफ , व्हीडियो भेजा है और उसको यदि आपने कम से कम दस या पांच या तीन या बीस जैसा कि उसमे लिखा है लोगो को यदि अगे्रषित नही किया तो आप सच्चे देष भक्त , सच्चे समाजसेवी , सच्चे पिता आदि आदि नही माने जायेंगे !

व्हाटस एप मे एक ही काम हो रहा है सबको ज्ञान बांटने का और नसीहत देने का एैसे जैसे कि पहले तो कोई ही माध्यम नही था कि ये बाते लोगो को पता चलती । पत्रिकाओ की ’दादी मां का खजाना’ जैसी कोई चीज नही थी , एसएमएस नही होते थे कुछ भी नही होता था । और इस अगे्रषित करने की चकरघिन्नी मे अब हो ये रहा है कि एक ही बात बार बार घूम फिर कर आ रही है किसी समूह को यह नयी लग सकती है , लेकिन कोई दूसरा कहेगा कि यह तो वे दो साल से देख सुन रहे है कुछ नया इसमे नही है ? और इसकी अधिकारिता का भी कोई प्रमाण नही है ?

लेकिन व्हाटस एप वाले इसकी परवाह न करते हुये उपदेषो से अपने को वाह वाह करने मे लगे है । ’ओल्ड हैबिटस डाई हार्ड’ वाली स्थिति हो गयी है यहां । यह देव भूमि है ऋषियो मुनियो ने हजारेा साल मात्र हवा या पानी पीकर तपस्या की है फिर वे उपदेष देते थे जो कि जीवनोपयोगी व कालातीत होते थे । वेद पुराण उपनिषद इसी से भरे पडे़ है । और इसका असर उपदेष सुनने वालो पर एैसा पडा़ है कि हमारा सबका डीएनए स्थायी रूप से इससे प्रभावित हो गया है । वो तो इस गुण को खाद पानी जमीं हवा नही मिल पा रही थी । यह कमी व्हाटस एप ने पूरी कर दी है। और उपदेषो की फसल हर जगह लहलहा रही है हर आदमी एक दूसरे को उपदेष दे रहा है और साथ मे यह नसीहत भी नही देना भूलता कि यदि आप सच्चे देष भक्त या समाजसेवी नही है तो ही इस उपदेष को जो उनके श्रीमुख मतलब संदेष से उपजा है को आगे बिना देर किये यदि आपको टट्टी भी लगी है या कि आप खाना खा रहे हो या कि कुल्ला कर रहे हो तो भी सबको छोेड़कर सबसे पहले इसे फारवर्ड कर दे। नही तो इतना नुकसान होगा जिसकी कि कल्पना नही की जा सकती है। जैसे कि उदाहरण ले लें एक उपदेषक ने एक मैसेज आपको लम्बा चैडा़ इतना भेजा कि हार्ट अटैक आने पर क्या करे और क्या न करे इससे कितने लोगो की जान बच सकती है । आपने यदि इसे तत्काल फारवर्ड नही किया तो पता है कि रिस्क क्या होगी कि न जाने कितने लोग हार्ट अटैक से दम तोड़ चुके होंगे ? यदि यह मैसेज भेज देते आप अपने प्रिय को और उसने पढ़ लिया होता तो वह हार्ट अटैक आने पर इन उपायो को जो कि उनके कहे अनुसार आज तक किसी को पता नही थे को अपनाकर कीमती जिंदगी बचा लेते ।

लेकिन गंगू को बात मे कुछ दम लगती है अब कि हां हार्ट अटैक और संदेषो मे संबंध तो है इतना सा है कि यदि इसी तरह उपदेषो का संदेषो के रूप मे प्रवाह नही रूका तो कम से कम उसका जीवन प्रवाह यानि की हार्ट अटैक आने की संभावना बहुत ज्यादा रहेगी। लम्बे संदेषो के कारण हो सकता है कि एक दो लोग हार्ट अटैक से चटक जाये !

गंगू लेकिन कहता है कि इसमे दोष किसी का नही है यह तो देवभूमि है यहां के तो पानी मे ही दूसरे को उपदेष देना निहित है और यही कारण है कि व्हाटएप मे उपदेष चक्कर लगाते रहते है। इसरो वाले उपग्रहो को भेजकर पृथ्वी का चक्कर लगवाते है और हम व्हाटएप वाले उपदेषो का चक्कर इंसान के चारो ओर लगवाते है कई कई बार। एक ही तरह का उपदेष जिसकी प्रमाणिकता की भी गारंटी नही है ले देकर सभी समूहो मे घूमता रहता है। एक उपदेष देने की कोषिष करता है तो दूसरा समूह कहता है रहने दे हम यह पढ चुके है!

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