Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 9, मार्च, 2017



दंश

सरिता सुराना


ऋचा आज बहुत उदास थी ,

हमेशा की तरह इस बार भी उसके शहर में जगह - जगह पर गरबा - डांडिया का आयोजन किया गया था। वह भी अपनी सहेलियों के साथ गरबा खेलने जाना चाहती थी परन्तु उसकी विवशता उसे ऐसा करने से रोक रही थी ।

दो साल पहले एक क्रिश्चियन स्कूल में टीचर की नौकरी पाने के लिए उसे अपना धर्म - परिवर्तन करना पङा था ।नौकरी के लिए कहां - कहां नहीं भटकी थी वह पर उसे हर जगह निराशा ही हाथ लगी ।अब यह नौकरी पाने के लिए उसके सामने एक ही शर्त थी कि वह ईसाई धर्म स्वीकार कर ले ।न चाहते हुए भी उसने यह शर्त स्वीकार कर ली क्योंकि पूरे परिवार के पालन - पोषण की जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी ।परन्तु धर्म परिवर्तन का यह ' दंश ' उसे बहुत साल रहा था।

www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें