Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 1, अंक 9, मार्च, 2017



बुकिंग

सरिता सुराना


बाजार में खरीददारी के दौरान अनीता को अपनी पुरानी पङौसन मिल गई ।दोनों वहीं खङे रहकर बातें करने लगी ।बातों ही बातों में पङौसन ने अनीता को बताया कि उसकी सायर बुआ गुजर गई । सुनकर अनीता ने अफसोस जताते हुए कहा - ' अभी तो उनकी उम्र छोटी ही थी ।'

' हाँ , मौत उम्र थोड़े ही देखती है ।अभी थोड़े दिन पहले ही बेटे की सगाई की थी औऱ दस दिन बाद शादी होनेवाली थी ।'

' फिर तो शादी पोस्टपोन कर दी होगी ।'

' अरे नहीं ! आपको तो पता ही है कि आजकल सब कुछ एडवांस बुक कराना पङता है ।इनके भी गेस्ट - हाऊस , गार्डन , कैटरिंग तथा टिकटें आदि सबकी ' बुकिंग ' करवाई हुई थी ।उन सबको कैंसिल करने से लाखों का नुकसान हो जाता ।'

सहेली की बात सुनकर अनीता सोच में पङ गई कि आजकल के इस भौतिकवादी युग में आदमी क्या करे ? मां की मौत का शोक मनाए या ' बुकिंग ' चालू रखे ?

www.000webhost.com

कृपया अपनी प्रतिक्रिया sahityasudha2016@gmail.com पर भेजें