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वर्ष: 1, अंक 9, मार्च, 2017



लोग

शबनम शर्मा

दूरदर्शन की सुर्खियाँ बनते
कुछ लोग,
अपनी छोटी-छोटी शिकायतें
करते कुछ लोग
बाँस-फूंस, मिट्टी, गोबर 
से बना अपना बसेरा 
दिखाते कुछ लोग, 
पीठ-पेट चिपका हुआ, 
हाथों के छाले, 
तन को चिथड़ों से छुपाते 
कुछ लोग 
बिखरे बाल, मैले कपड़े
नंगे बदन, गन्दे 
नाले में मिट्टी से बच्चे 
नहलाते कुछ लोग,
शायद मालूम नहीं 
ऐश में रहने वालों को, 
इनके पसीने, खून, भूख 
की ईंटो से ही बनते 
हैं इनके महल 
जिन्हें तुच्छ कहते हैं 
कुछ लोग।
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