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वर्ष: 1, अंक 9, मार्च, 2017



सफलता का सूत्र

ब्रिजेन्द्र अग्निहोत्री

असफलताओं से घबराना 
जीते जी होता मर जाना 
सफल वही होते हैं जग में 
जिसने दुःख में है सुख माना 

जीवन कि जुगुत्स लालसा 
कर देती है नर को अंधा
स्वार्थ का जीवन जीता है वह 
बंद करे न गोरखधंधा 
मानव-जीवन की अभिलाषा 
पूर्ण न होती सबने माना 

मानव-जीवन बहता सागर 
जिसमें दुःख-सुख दोनों मिलते 
जिस जीवन में व्याप्त निराशा 
उस जीवन में दुःख ही मिलते 
आशा पल्लवित जीवन ने ही 
जीने का असली सुख जाना 

सफल वही होते हैं जग में 
जिसने दुःख में है सुख माना 
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