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वर्ष: 2, अंक 29,  जनवरी(द्वितीय), 2018



माँ का पत्र


सपना परिहार


"राम तुम्हारी माँ का पत्र आया है ,दीपा ने चिढ़ते हुए कहा "।

क्या लिखा है जरा पढ़ना तो राम ने दीपा से कहा ।

"क्या लिखा होगा !यही कि सर्दियाँ आ गयी है ,मुझे यहां से ले जाओ। "

हर बार का नाटक ,बीमारी का बहाना बना कर आ जाती है और पूरी ठंड में हमे परेशान होना पड़ता है उनकी देखभाल में ।

मै कह देती हूं इस बार मुझसे कोई उम्मीद मत करना ,दीपा बोले ही जा रही थी ।

बेचारा राम अपनी बेबसी छुपा रहा था कि वो माँ को कैसे मना करे यहाँ न आने का ।

माँ को अस्थमा था और सर्दी में तबियत ज्यादा खराब हो जाती थी इस कारण माँ ठंड में राम के पास आकर रहती थी ।

राम ने माँ को पत्र लिखा -"माँ कुछ पैसे भेज रहा हूँ ,अपनी देखभाल के लिए किसी बाई को रख लेना ,मैं तुम्हे इस बार लेने नही आ सकता ।" पत्र में राम की विवशता मौन रूप से दिखाई दे रही थी ।


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