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वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



साल नया है


प्राण शर्मा


   
      
ढोल बजाओ , धूम मचाओ साल नया है 
कुछ ऐसा  ही रंग जमाओ साल नया है 
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झूमो , नाचो और लहराओ साल नया है 
बात बने जब जश्न मनाओ साल नया है 
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खुल कर आपस में मुस्काओ साल नया है 
चिंताओं से छुट्टी पाओ साल नया है 
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उससे अब क्या लेना - देना है ऐ यारो 
यानी नफ़रत दूर भगाओ साल नया है 
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अपने को ही महकाया तो क्या महकाया 
औरों को भी तुम महकाओ साल नया है 
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मुँह लटकाये क्यों कोई अब घर में बैठे 
ऐसे बशर को गले लगाओ साल नया है 
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सुथरे - सुथरे , रंग-बिरंगे कपड़े पहनो 
स्वर्ग लगे यूँ शहर सजाओ साल नया है 
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अपना हो या बेगाना हो , याद करें सब 
मुँह मीठा ऐ `प्राण` कराओ साल नया है 

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