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वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



वो जो सबसे हसीन होता है


गंगाधर शर्मा 'हिन्दुस्तान'


 

वो जो सबसे हसीन होता है ।
दीद उसका संगीन होता है ।

टूटता है शाख से हरदम ।
गुल तो ताजा तरीन होता है ।

पैठता है उतना गहरा वो ।
जो भी जितना महीन होता है ।

जज्बात ही नहीं जिसमें ।
शख्स वो बस मशीन होता है ।

कल को होगा कारोबार वही ।
आज दिन जो कहीं न होता है ।

दे सके कायमी सुकूं सबको ।
सिर्फ खुद का कोफीन होता है ।

जो तोड़ता है कायदा अक्सर ।
वही हासिले तौहीन होता है ।

‘हिन्दुस्तान’ करे वो दूसरों पे यकीं ।
जिसको खुद पर यकीन होता है ।।

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