Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



बहुत रोये हम मुस्कुराने से पहले


धर्मेन्द्र अरोड़ा"मुसाफ़िर"


 
           
ग़मे ज़िंदगी आज़माने से पहले!
बहुत रोये हम मुस्कुराने से पहले!!
 
चरागे मुहब्बत जलाने से पहले!
ज़रा सोच लो दिल लगाने से पहले!!

खुदा ने किया है इशारा सुहाना!
नसीमे सहर को चलाने से पहले!!

निगाहों निगाहों में इज़हार करना!
जुबाँ रोकना कुछ बताने से पहले!!

हमेशा सजाओ तसव्वुर निराला! 
ग़ज़ल दिलनशीं गुनगुनाने से पहले!!

दिख़ावा भुलाओ हमेशा मुसाफ़िर!
ख़ुशी का ख़ज़ाना लुटाने से पहले!!

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com