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वर्ष: 2, अंक 29, जनवरी(द्वितीय), 2018



देखो हाथी आया


डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प


  
देखो-देखो हाथी आया ।
लंबा सूंड हिलाते आया ।।

फल-पत्तियाँ तोड़-ताड़कर ।
मन अपना बहलानें आया ।।

डुबकी खूब लगा नदिया में ।
वह तो रंग जमानें आया ।।


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