Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 28,  जनवरी(प्रथम), 2018



आग


शशांक मिश्र भारती


बेघर सरिता कड़कड़ाती ठण्डक में विवशता से इधर-उधर भटक रही थी कहीं आग दिख जाये, तो उसी के सहारे रात कट जायेगी।

अभी वह जाकर चैराहे पर आग सेंकने बैठी ही थी कि एक फौलादी हाथ उसको अपने कमरे में घसीट ले गया और अपनी आग शान्त करने लगा।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com