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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



नारी हूँ मैं


शुचि 'भवि'


         

ऊँचाइयों और ऊँची हो जाओ
उठ ही आऊँगी मैं,
तुम्हारे पहलु में आकर ही
अब सुस्ताऊँगी मैं.

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