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वर्ष: 2, अंक 28, जनवरी(प्रथम), 2018



आँसूं तुम्हारा था


शुचि 'भवि'


 

आँख की कोर में बसा
आँसूं तुम्हारा था
लबों की लाली में भी
रंग तुम्हारा था
सबकुछ ही तो था
तुम्हारा
बस तुम्हें छोड़ कर,,,,


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